अध्याय 1
भारतीय समाज – एक परिचय [Indian Society – An Introduction]
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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1.भारत सिद्धान्त और वास्तविक रूप में एक समाज है-
(A) बहुल, (C) कठोर,
(B) मिश्रित, (D) सरल।
प्रश्न 2.सात द्वीपों में एक जम्बूदीप किसे कहा जाता है ?
(A) बांग्लादेश, (C) भारत
(B) नेपाल, (D) पाकिस्तान
प्रश्न 3.समाजशास्त्र के पिता के रूप में किसे जाना जाता है? (
(A) ऑगस्ट कॉम्टे, (C) हरबर्ट स्पेन्सर,
(B) इमाइल दुर्खीम, (D) सोरोकिन या घुरिये
प्रश्न 4.विश्व में समाजशास्त्र का नाम सबसे पहले प्रयोग में आया-
(A) 1798, (C) 1851,
(B) 1842, (D) 1838.
प्रश्न 5.समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र सम्बन्धी कितने सम्प्रदाय प्रचलित हैं?
(A) दो, (C) चार,
(B) तीन, (D) पाँच।
प्रश्न 6.समाजशास्त्र समाज का विज्ञान है, किसने कहा?
(A) वार्ड, (C) सिम्मेल,
(B) ऑगस्ट कॉम्टे (D) दुर्खीम।
प्रश्न 7.समाजशास्त्र एक ऐसा विषय है जिसका ज्ञान मानव को होता है-
(A) पूर्व ज्ञान से, (C) परिवार से
(B) समाज से (D) इन सभी से ।
प्रश्न 8.समाजशास्त्र निम्नलिखित में से किसका वर्णन है?
(A) क्या होना चाहिए का, (C) क्या है का,
(B) उचित – अनुचित का, (D) क्या नहीं का।
प्रश्न 9.सामाजिक तथ्यों में निम्नलिखित में से कौन-सा गुण होता है?
(A) सरलता का (C) तटस्थता का,
(B) जटिलता का, (D) स्थिरता का।
प्रश्न 10.समाजशास्त्र की किस प्रकार की प्रकृति है?
(A) वैज्ञानिक, (C) कलात्मक,
(B) मानवीय (D) सामान्य।
प्रश्न 11.समाजशास्त्र एक विज्ञान है क्योंकि इसमें उपयोग होता है-
(A) तुलनात्मक पद्धति का, (C) वैज्ञानिक पद्धति का
(B) ऐतिहासिक पद्धति का, (D) सांख्यिकीय पद्धति का
प्रश्न 12.समाजशास्त्र एक विज्ञान है-
(A) आत्मनिर्भर, (C) परतन्त्र,
(B) व्यावहारिक, (D) आदर्शात्मक।
प्रश्न 13.निम्नलिखित में से विज्ञान का कौन-सा तत्व है?
(A) साक्षात्कार, (C) सत्यापन,
(B) वर्णन, (D) इनमें से कोई नहीं।
प्रश्न 14.समाजशास्त्र का भौतिक या प्राकृतिक घटनाओं के साथ-
(A) कोई प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं है, (C) कोई सम्बन्ध नहीं है,
(B) कोई अप्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं है, (D) प्रत्यक्ष सम्बन्ध है।
प्रश्न 15.समाजशास्त्र की वैज्ञानिक प्रकृति के विरुद्ध निम्नलिखित में से कौन-सी आपत्ति उठाई जाती है?
(A) यह समाज में फैले हुए अन्धविश्वासों और कुरीतियों पर ध्यान नहीं देता,
(B) यह प्राकृतिक विज्ञानों के समान अपना अध्ययन वस्तुनिष्ठता के साथ नहीं कर सकता है,
(C) यह केवल सामाजिक समस्याओं पर हो विचार कर सकता है,
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
| उत्तर- 1. (A), 2. (C), 3. (A), 4. (D), 5. (A), 6. (A), 7. (D), 8. (C), 9. (B), 10. (A), 11. (C), 12. (A), 13. (C), 14. (A), 15. (B). |
रिक्त स्थान पूर्ति
- समाजशास्त्र के लिए ———बाधक भी है और सहायक भी।
- समाजशास्त्र उन सभी विषयों से अलग है जिसमें कोई भी ————– शुरूआत नहीं करता है।
- समाज—————– होता है।
- समाज सामाजिक सम्बन्धों का —————है।
- मानव समाज में —————–विशेषताएँ पाई जाती हैं।
- एक समाज में व्यक्ति के सम्बन्धों का क्षेत्र——————- होता है।
- भारत में —————–‘के मध्य धीरे-धीरे राष्ट्रवाद उत्पन्न होना शुरू हुआ।
- समाजशास्त्र हमें सीखने का निमन्त्रण देता है कि संसार को अलग-अलग ———– से कैसे देखा जाए।
- अन्य विज्ञानों की तरह समाजशास्त्र की ——————प्रकृति है।
- संस्कृति, धर्म, क्षेत्र तथा भाषा की भिन्नताओं को———————— ‘भिन्नताएँ कहा जाता है।
- राष्ट्रीय एकता में ———————–बाधक तत्त्व है।
- भारत की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता अनेकता में ————————–[‘है।
- भारतीय समाज की विविधता के कारण इसे एक —————–समाज कहा जाता है।
- समाजशास्त्र आपकी ———– एवं ————- के बीच कड़ियों एवं सम्बन्धों की उजागर करने में मदद करता है।
- एक सामाजिक मुद्रा—————— से सम्बन्धित होता है।
- औपचारिक नियन्त्रण के साधनों में प्रमुख ——————-है।
- शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य व्यक्ति का———————– एवं————— है।
- औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण की प्रक्रिया ———————–से सम्बन्धित है।
- पश्चिमीकरण शब्द ————————-समाज व संस्कृति में उत्पन्न हुए परिवर्तनों के लिए प्रयोग किया जाता है।
- औद्योगिकीकरण ———————-विकास की एक प्रक्रिया है।
उत्तर- 1. सहज ज्ञान, 2. शून्य से 3. अमूर्त, 4. व्यवस्था, 5. सामाजिक एवं सांस्कृतिक, 6. सीमित, 7. 19वीं सदी, 8. दृष्टिकोणों, 9. वैज्ञानिक, 10. सजातीय, 11. जातिवाद, 12. एकता, 13. बहुल, 14. व्यक्तिगत परेशानियाँ, सामाजिक मुद्दों, 15 बड़े समूह से, 16. कानून, 17. समाजीकरण, संस्कृतिकरण, 18. ऐतिहासिक उपागम, 19. भारतीय, 20. आर्थिक।
सत्य/असत्य
- राष्ट्रीय एकता में साम्प्रदायिकता सहायक है।
- शिक्षा संस्कृति के हस्तांतरण में सहायक होती है।
- भारतीय राजनीति में जातीय संगठन का कोई महत्त्व नहीं होता है।
- धर्म एवं शिक्षा सामाजिक नियन्त्रण नहीं कर सकते।
- समाजशास्त्र में ऐतिहासिक उपागम को दूसरे उपागम की तुलना में कम महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
- नवीन उद्योगों की स्थापना और उनका विकास औद्योगिकीकरण कहलाता है।
- अनौपचारिक शिक्षा का केन्द्र समाज है।
- समाजशास्त्र के अलावा अन्य विषयों को हम सिखाए जाने के कारण ही सीख पाते हैं।
- सहज ज्ञान या सहज बोध समाजशास्त्र के लिए केवल बाधक है सहायक नहीं।
- समाजशास्त्र हमें सीखने का निमन्त्रण देता है कि संसार में हमारे अलावा अन्य दृष्टिकोण से कैसे देखा जाए ?
- समाजशास्त्र के क्षेत्र में सत्य की बहुलता एक समस्या है तो इसका समाधान तुलना है।
- भारतीय समाज और इसकी संरचना आपको एक सामाजिक नक्शा प्रदान करती है।
- माता-पिता के व्यवसाय एवं आपके परिवार की आय के मुताबिक आप एक आर्थिक वर्ग के सदस्य नहीं होंगे।
- समाजशास्त्र आपकी व्यक्तिगत परेशानियों एवं सामाजिक मुद्दों के बीच की कड़ियों एवं सम्बन्धों को उजागर करने में मदद कर सकता है।
- औपनिवेशिक दौर में एक विशिष्ट भारतीय चेतना ने जन्म लिया।
| उत्तर- 1. असत्य, 2. सत्य, 3. असत्य, 4. असत्य, 5. सत्य, 6. सत्य, 7. सत्य, 8. सत्य,mn 9. असत्य, 10. सत्य, 11. सत्य, 12. सत्य, 13. असत्य, 14. सत्य, 15. सत्य। |
जोड़ी मिलाइए
[ ! ]
- दस्तकारों, कारीगरों और शिल्पियों का गाँव (i) मैकाइवर एवं पेज
- सेवाएं लेने वाला समूह या लोग (ii) जे. एच. हन
- ‘समाज’ पुस्तक के लेखक (iii) परिवार
- ‘भारत में जाति’ पुस्तक के लेखक (iv) संस्कृतिकरण
- पैतृक व मातृक सिद्धान्त (v) जजमान
- परिवर्तन की प्रक्रिया (vi) गैर-कृषक गाँव
| उत्तर—-1. (vi), 2. → (v), 3. → (1), 4. → (ii), 5.→ (iii), 6. → (iv) I |
[II]
- सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया (i) धर्मनिरपेक्षता
- राजनीतिक आधार पर निरपेक्षता का अर्थ (ii) पश्चिमीकरण
- सभी धर्मों के प्रति समानता की भावना (iii) प्रभु जा ति
- सांस्कृतिक संरचना में परिवर्तन करने वाली प्रक्रिया (iv) आर्थिक
- प्रभावी जातियों का किसान वर्ग (v) तटस्थता या समानता
- वर्ग का आधार (vi) धर्मनिरपेक्षीकरण
| उत्तर—1. → (vi), 2. (v), 3. (i), 4. (ii) 5. (i) 6. (iv) 1 |
एक शब्द / वाक्य में उत्तर
- एक धार्मिक समुदाय की दूसरे धार्मिक समुदाय के प्रति विद्वेष की भावना क्या कह है ?
- व्यक्तियों का एक ऐसा समूह जो सामाजिक स्थिति, विचारों, भावनाओं में एक-दूसरे के प्रति व्यवहार में समान होते हैं, क्या कहलाते हैं ?
- वह कौन-सी प्रक्रिया है जिसमें हम स्वयं को बाहर से कैसे देख सकते हैं?
- राष्ट्रीय एकता में सर्वप्रथम बाधक तत्त्व क्या है?
- वह कौन-सी प्रक्रिया है जिसके द्वारा बड़े पैमाने पर नवीन उद्योगों को प्रारम्भ किया जाता है?
- किसी निम्न जाति द्वारा अपने से ऊँची जातियों को सांस्कृतिक विशेषता को ग्रहण करना क्या कहलाता है?
- देश के सन्तुलित आर्थिक विकास के लिए किसकी अत्यन्त आवश्यकता है?
- नगरीकरण के फलस्वरूप विकसित जीवन-शैली को क्या कहा जाता है?
- किस नियोजन से विकासशील प्रक्रियाओं को प्रोत्साहन मिलता है?
- भारत में स्वतन्त्रता के बाद आर्थिक विकास के लिए किस अर्थव्यवस्था को स्थापित किया गया ?
- उपभोक्ता और प्रदर्शनवाद किस वर्ग की विशेषता है?
- वर्तमान युग में सांस्कृतिक परिवर्तन का सबसे प्रभावपूर्ण साधन क्या है?
- शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य क्या है ?
- भारतीय समाज में विविधता के क्या परिणाम है?
- कौन-सा जीवन विकसित प्रौद्योगिकी पर आधारित है?
- नगरीय जीवन की एक अनिवार्य विशेषता क्या है?
- बुजुर्ग एवं युवा पीढ़ियों का अन्तराल क्या कहलाता है?
- उपनिवेशवाद के शत्रु का क्या नाम है?
- क्रान्ति का उचित परिणाम क्या होता है ?
| उत्तर- 1. साम्प्रदायिकता, 2. एक वर्ग 3. आत्मवाचक, 4. क्षेत्रवाद एवं भाषावाद. 5. औद्योगीकरण, 6. संस्कृतिकरण, 7. औद्योगिकीकरण की 8. नगरीयता, 9. आर्थिक नियोजन से, 10 मिश्रित अर्थव्यवस्था को, 11. नव मध्यम वर्ग की, 12. जनसंचार, 13. व्यक्ति का समाजीकरण करना, 14. क्षेत्रवाद, भ्रष्टाचार तथा अपराधों में वृद्धि, 15. नगरीय, 16. प्रतिस्पर्द्धा, 17. एक सामाजिक प्रघटना, 18. राष्ट्रवाद, 19. सामाजिक विघटन | |
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. समाजशास्त्र क्या है?
उत्तर- समाजशास्त्र मानव समाज का अध्ययन है, जो मानवीय सामाजिक संरचना और गतिविधियों से सम्बन्धित जानकारी को परिष्कृत करने और उनका विकास करने के लिए विभिन्न पद्धतियों का उपयोग करता है।
प्रश्न 2. भारतीय समाज की विभिन्नता के प्रमुख तत्व बताइए।
उत्तर- भारतीय समाज में धर्म, भाषा, प्रजाति विभिन्नता के प्रमुख तत्व हैं।
प्रश्न 3. सामाजिक संरचना से आप क्या समझते हैं?
उत्तर– सामाजिक संरचना अमूर्त होती है। सामाजिक प्रक्रियाएँ सामाजिक संरचना. का महत्त्वपूर्ण पक्ष है।
प्रश्न 4. उपनिवेशवाद से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर – किसी एक भौगोलिक क्षेत्र के लोगों द्वारा किसी दूसरे भौगोलिक क्षेत्र में उपनिवेश (कॉलोनी) स्थापित करने की प्रक्रिया को उपनिवेश कहा जाता है। पश्चिमी तथा शक्तिशाली देशों के द्वारा एशिया तथा अफ्रीका के देशों में इसी प्रकार अपने उपनिवेशों की स्थापना की गई।
प्रश्न 5. भारत में राष्ट्रवाद कब उत्पन्न हुआ?
उत्तर- 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में राष्ट्रीय भावना के विकास के परिणामस्वरूप राजनीतिक आन्दोलन का सूत्रपात हुआ भारतीयों ने राजनीतिक आन्दोलन के माध्यम से अंग्रेजी सत्ता से मुक्ति प्राप्त करने के लिए एक लम्बा संघर्ष किया।
प्रश्न 6. औपनिवेशक दौर में भारतीय समाज में कैसे परिवर्तन आए?
उत्तर- औपनिवेशक दौर में एक विशेष भारतीय चेतना ने जन्म लिया जिससे भारतीय समाज में एकीकरण, पूँजीवादी आर्थिक परिवर्तन, आधुनिकीकरण इत्यादि परिवर्तन आए।
प्रश्न 7. भारत में राष्ट्रवाद कैसे उत्पन्न हुआ ?
उत्तर- अंग्रेजों द्वारा किए जाने वाले शोषण ने भारत की जनता का आर्थिक, राजनीतिक तथा प्रशासनिक एकीकरण किया। भारतीयों ने पश्चिमी शिक्षा ग्रहण करनी शुरू की इससे उपनिवेशवाद के शत्रु राष्ट्रवाद का जन्म हुआ।
प्रश्न 8. कौन-कौनसे देशों ने एशिया तथा अफ्रीका में अपने उपनिवेश स्थापित किए?
उत्तर- उपनिवेशवाद का दौर 18वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी के मध्य तक चला। इसमें इंग्लैण्ड, फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन, जर्मनी, इटली आदि हैं तथा बाद में इसमें रूस, अमेरिका, जापान जैसे देश भी शामिल हो गए।
प्रश्न 9. सामाजिक वर्ग से क्या आशय है?
उत्तर—सामाजिक वर्ग समाज में आर्थिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं का समूह है। समाजशास्त्रियों, राजनीतिक वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों, मानवविज्ञानियों आदि के लिए यह एक आवश्यक वर्ग है।
प्रश्न 10. वर्ग क्या है?
उत्तर- वर्ग वास्तव में मानव समाज की वह व्यवस्था है जहाँ समाज में व्यक्ति की एक विशेष स्थिति होती है। समाज में समान स्थिति वाले व्यक्तियों के समूह को वर्ग कहते हैं।
प्रश्न 11. समुदाय का क्या अर्थ है ?
उत्तर—समुदाय उस छोटे या बड़े समूह को कहते हैं, जिसके सभी सदस्य किसी, क्षेत्र की सीमा में इस प्रकार समग्र जीवन बिताते हैं कि वे किसी विशेष हित की पूर्ति मात्र ही नहीं, बल्कि सामान्य जीवन की सभी बुनियादी शर्तों की पूर्ति में पारस्परिक सहयोग करते हैं।
प्रश्न 12. नव उपनिवेशवाद क्या है?
उत्तर-विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों के आन्तरिक मामलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किए जाने वाले हस्तक्षेप को उपनिवेशवाद कहा जाता है।
प्रश्न 13. सामाजिक मानचित्र से क्या आशय है?
उत्तर—समाज में जन्म के आधार पर व्यक्ति की अवस्थिति। इसमें आयु, क्षेत्र, आर्थिक व्यवस्था, धर्म तथा जातिगत सीमाएँ शामिल होती है।
प्रश्न 14. क्या राज्य एक समुदाय है ? बताइए।
उत्तर – राज्य उस संगठित इकाई को कहते हैं जो एक शासन (सरकार) के अधीन हो। राज्य सम्प्रभुता सम्पन्न हो सकते हैं। इसके अलावा किसी शासकीय इकाई या उसके किसी प्रभाग को भी राज्य कहते हैं। जैसे- भारत के प्रदेशों को भी ‘राज्य’ कहते हैं।
प्रश्न 15. सामाजिक समूह किसे कहते हैं?
उत्तर-सामाजिक समूह उन सामाजिक प्राणियों का एक संग्रह है जिनके बीच किसी-न-किसी प्रकार का सम्बन्ध पाया जाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. भारत के राष्ट्रीय एकीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- राष्ट्रीय एकीकरण का तात्पर्य है-राष्ट्र में रहने वाले निवासियों के बीच जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा का भेदभाव किए बिना उनमें परस्पर समान अनुभूतियों और सुख-दुःख की एकता की भावना का होना। राष्ट्रीय एकीकरण मूलतः राष्ट्र में भावात्मक एकीकरण है। राष्ट्र के निवासियों के मन में व्याप्त एकता की भावना राष्ट्रीय एकीकरण का आधार है। राष्ट्रीय एकीकरण नागरिकों के विचार व्यवहार और संकल्प से उत्पन्न होता है। एक नागरिक होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह उन शक्तियों और विचारों का विरोध करे और उनका सामना करे जो राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को कमजोर करती हैं तथा ऐसे कार्य करे जिससे राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय एकीकरण मजबूत होता है।
प्रश्न 2. अन्य विषयों की तुलना में समाजशास्त्र एक भिन्न विषय क्यों है ?
उत्तर- समाजशास्त्र अन्य विषयों की तुलना में उन वस्तुओं के बारे में ज्यादा चर्चा करता है जिनके बारे में अधिकांश लोग पहले से जानते हैं। हम एक समाज में रहते हैं तथा हम पहले से ही समाजशास्त्र की विषय-वस्तु, सामाजिक समूहों, संस्थाओं, मानकों, सम्बन्धों तथा अन्य के बारे में अपने अनुभवों के द्वारा काफी हद तक जानते हैं। अन्य विषयों की शिक्षा हमें घर, विद्यालय या अन्य स्थानों पर निर्देशों के द्वारा प्राप्त होती है, किन्तु समाज के बारे में हमारा ज्ञान बिना किसी सुस्पष्ट शिक्षा से अर्जित होता है। समय के साथ बढ़ने वाला यह एक अभिन्न अंग की तरह है जो स्वाभाविक तथा स्वतः स्फूर्त तरीके से प्राप्त होता है।
प्रश्न 3. आत्मवाचक क्या है?
उत्तर- समाजशास्त्र आपको यह दिखा सकता है कि दूसरे आपको किस तरह देखते हैं; यूँ कहें, आपको यह सिखा सकता है कि आप स्वयं को बाहर से कैसे देख सकते हैं। इसे ‘स्ववाचक’ या ‘आत्मवाचक’ कहा जाता है। यह अपने बारे में सोचने, अपनी दृष्टि को लगातार अपनी तरफ घुमाने (जो कि अक्सर बाहर की तरफ होती है) की क्षमता है। परन्तु यह स्वनिरीक्षण आलोचनात्मक होना चाहिए इसमें समीक्षा अधिक और आत्ममुग्धता कम होनी चाहिए।
प्रश्न 4. भारतीय समाज विविध संस्कृतियों, लोगों, विश्वासों, मान्यताओं का जटिल मिश्रण है, कैसे?
उत्तर- भारत एक प्राचीन देश है, कुछ अनुमानों के अनुसार भारतीय सभ्यता लगभग 5 हजार वर्ष पुरानी है, इसलिए इसका समाज भी बहुत पुराना और जटिल प्रकृति का है। अपनी लम्बी ऐतिहासिक अवधि के दौरान भारत बहुत से उतार-चढ़ावों और अप्रवासियों के आगमन का गवाह है; जैसे आर्यों का आगमन, मुस्लिमों का आगमन आदि ये लोग अपने साथ जातीय – बहुरूपता और संस्कृति को लेकर आए साथ ही भारत की विविधता में योगदान दिया। इसलिए भारतीय समाज विविध संस्कृतियों, लोगों, विश्वासों तथा मान्यताओं का जटिल मिश्रण है।
प्रश्न 5. औपनिवेशिक दौर ने किस प्रकार भारतीय राष्ट्रवाद को जन्म दिया?
उत्तर- (1) औपनिवेशिक शासन के दौरान पहली बार सम्पूर्ण भारत को भौगोलिक तथा प्रशासनिक दृष्टि से एकीकृत किया गया।
(2) औपनिवेशिक शासन के शोषण तथा प्रभुत्व ने भारतीय समाज को कई प्रकार से भयभीत कया।
(3) तेजी से बढ़ते शोषण तथा औपनिवेशिक प्रभुत्व के साझे अनुभवों ने भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों तथा समुदायों का भी गठन किया।
(4) औपनिवेशिक शासकों के विरुद्ध संघर्ष के दौरान लोग आपसी एकता को पहचानने लगे। वे यह जानने लगे कि विदेशी शासकों को एकजुट होकर ही देश के बाहर निकाला जा सकता है।
(5) औपनिवेशिक काल में भारतीयों की इसी चेतना ने राष्ट्रवाद को जन्म दिया।
प्रश्न 6. भारत में होने वाली उन प्रक्रियाओं के विषय में बताइए जो औपनिवेशिक काल के दौरान प्रारम्भ की गईं।
उत्तर- भारतीय राष्ट्रवाद ने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के अन्तर्गत आकार लिया। औप- निवेशिक प्रभुत्व के साझे अनुभवों ने समुदाय के विभिन्न भागों को एकीकृत करने एवं बल प्रदान करने में मदद की। पाश्चात्य शैली की शिक्षा की बदौलत उभरते मध्यम वर्ग ने उपनिवेशवाद को उसकी अपनी मान्यताओं के आधार पर ही चुनौती दी, कई तरह की सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ विकसित हुईं, नए वर्गों एवं समुदायों का जन्म हुआ, जाति आध रित समुदायों ने भी अपना वर्चस्व दिखाया तथा आधुनिकीकरण की शक्तियाँ भारत मेंm प्रवेश करने लगीं।
प्रश्न 7. समाजशास्त्र से हमें क्या सीखने को मिलता है?
उत्तर– समाजशास्त्र के माध्यम से हम यह सीख सकते हैं कि विश्व को केवल अपने दृष्टिकोण से कैसे देखा जाए। इसमें अलग-अलग पक्षपात व अधूरेपन से हम एक महत्त्वपूर्ण सबक सीख सकते हैं। मानव समाज में सत्य की ओर बढ़ना हो तो सर्वप्रथम हमें यह स्वीकार करना होगा कि सत्य एक नहीं अनेक है और प्रत्येक सत्य अपने में अपूर्ण है। समाजशास्त्र के क्षेत्र में सत्य की बहुलता एक समस्या है लेकिन इसका समाधान ‘तुलना’ है (विभिन्न लोगों के अलग-अलग नजरियों को आमने-सामने किया जाए)। यह हमें भारतीय समाज की समझ और जानकारी देता है। सामाजिक नक्शे से हम भाषा, समुदाय, व्यवसाय, आर्थिक वर्ग आदि की जानकारी प्राप्त करते हैं। अतः समाजशास्त्र हमें समाज में पाए जाने वाले समूहों, वर्गों, उनके सम्बन्धों के विषय के बारे में बताता है जिससे हमें समाज को समझने की क्षमता मिलती है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. भारत के राष्ट्रीय एकीकरण की मुख्य समस्याएँ क्या हैं?
उत्तर- भारत के राष्ट्रीय एकीकरण की मुख्य समस्याएँ अग्रलिखित हैं-
(1) क्षेत्रवाद और भाषावाद – भारत में विभिन्न क्षेत्रों के प्राकृतिक साधनों, रीति- रिवाज व्यवहार के तरीके और अलग-अलग विश्वासों के कारण सभी क्षेत्र अपने-अपने लिए माँग करते हैं। भाषा के आधार पर नए-नए राज्यों की माँग बढ़ती जा रही है।
(2) साम्प्रदायिक संघर्षो में वृद्धि – समाज में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक वर्गों की शुरूआतों ने विभिन्न सम्प्रदायों को जन्म दिया। प्रत्येक वर्ग ने अपने आपको अलग वर्ग के रूप, में देखना शुरू कर दिया। परिणामस्वरूप साम्प्रदायिक संघर्ष बढ़ने लगे।
(3) भ्रष्टाचार – भारत में भ्रष्टाचार व्यापक पैमाने पर व्याप्त है जिससे पूरा जनमानस ग्रसित है। भ्रष्टाचार के कारण ही देश में सैद्धान्तिक मूल्यों के समाप्त होने से एकता संकट में पड़ रही है।
(4) अपराधों में वृद्धि – देश में बढ़ रहे राजनैतिक भ्रष्टाचार के कारण शासनतन्त्र कमजोर पड़ने लगा है जिससे संगठित अपराधों में वृद्धि होने लगी है। क्षेत्रीय और राजनैतिक प्रभाव के कारण बड़े-बड़े अपराधी सजा से बच जाते हैं।
(5) संजातीयता में वृद्धि – देश में सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता के कारण संजातीयता की समस्या बढ़ने लगी। संजातीयता वह भावना है जो एक विशेष धर्म, संस्कृति, क्षेत्र या भाषा वाले समुदाय को अपनी अलग पहचान बनाने की प्रेरणा देती है।
प्रश्न 2. समाजशास्त्र के महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर– समाजशास्त्र का महत्त्व निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से जान सकते हैं-
(1) समग्र मानवता एवं समाज से परिचय– एक सामाजिक विज्ञान के रूप में, समाजशास्त्र हमारा परिचय समग्र मानवता एवं समाज से कराता है। अनेक देशों के समाजशास्त्री विभिन्न समाज तथा उनके सदस्यों के सामाजिक जीवन का अध्ययन तथा उनके सम्बन्ध में व्यवस्थित ज्ञान का संग्रह करते हैं।
(2) नवीन सामाजिक परिस्थितियों का सामना करने में सहायक– आज मानव गतिशील है। आज मानव ने विज्ञान, कला, ज्ञान, जीवन, विचार, शिक्षा इत्यादि में आधुनिक प्रगति कर ली है लेकिन प्राचीन मान्यताओं में भी तीव्र परिवर्तन हो रहे हैं। व्यक्ति के सम्मुख एक बड़ी समस्या इन नवीन परिवर्तनों से सामना करने की है। समाजशास्त्रीय ज्ञान ही व्यक्ति को नवीन परिस्थितियों से सामना कर सामंजस्य बैठाने में मदद करता है।
(3) नगर नियोजन में सहायक- देश की औद्योगिक प्रगति नगरों को बढ़ावा देती है। भारत के औद्योगिक नगरों में आज भी स्थायी श्रम शक्ति का अभाव है, जिसके कारण श्रमिक संघों का विकास नहीं हो पाता। नगरों में अस्वास्थ्यकर दशाएँ देखकर श्रमिक गाँवों में रहना ही पसन्द करता है। समाजशास्त्रीय ज्ञान नगर नियोजन में सहायक सिद्ध हो सकता है। साथ ही रूढ़िवादिता को भी समाप्त करता है।
(4) सह-अस्तित्व की भावना का प्रसार– समाजशास्त्र का ज्ञान विश्व में सह-अस्तित्व की भावना के प्रसार में भी अत्यधिक सहायक सिद्ध हो सकता है। समाजशास्त्रीय ज्ञान हमें सिखाता है कि विश्व में प्रत्येक व्यक्ति एवं समूह को रहने का अधिकार है।
(5) दण्ड व्यवस्था एवं सुधार कार्यों में सहायक–औद्योगीकरण के फलस्वरू देश में अपराधों, सफेदपोश अपराधियों की संख्या में भी इजाफा हुआ। समाजशास्त्र हमें या ज्ञान देता है कि अपराधी क्यों अपराध करता है व उसका किस विधि से सुधार करना चाहिए। अक्सर हमें
प्रश्न 3. क्या कारण है कि समाजशास्त्र को पढ़ने या सीखने के लिए सहज बोध छोड़ना पड़ता है?
अथवा
सहज ज्ञान या सहज बोध समाजशास्त्र के लिए बाधक भी है और सहायक भी। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—सहज ज्ञान या सहज बोध समाजशास्त्र के लिए बाधक है-सहज बोध द्वारा प्राप्त किया गया ज्ञान समाजशास्त्र के लिए बाधा है क्योंकि समाजशास्त्र समाज के व्यवस्थित व वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है। इस प्रकार की अध्ययन प्रक्रिया को सीखने और समझने के लिए अनिवार्य है कि हम अपने सहज बोध को ‘भूलने’ या मिटा देने की भरपूर कोशिश करें। जैसे किसी बुने हुए स्वेटर या अन्य वस्त्र को नए सिरे से बुनने के लिए पहले की बुनाई को उधेड़ना पड़ता है ठीक उसी तरह समाजशास्त्र को सीखने से पहले हमें समाज के बारे में अपनी पूर्व धारणाओं को उधेड़ना पड़ता है या छोड़ना पड़ता है। समाज के बारे में हमारा पहले का ज्ञान एक विशिष्ट दृष्टिकोण से प्राप्त किया हुआ होता है। समाजशास्त्र हमें यह सीखने का निमन्त्रण देता है कि संसार को केवल हमारे अपने दृष्टिकोण के अलावा हमसे अलग दृष्टिकोणों से कैसे देखा जाए। मानव समाज के सन्दर्भ में ‘वैज्ञानिक सत्य’ की ओर बढ़ना हो तो सबसे पहले यह स्वीकार करना होगा कि सत्य एक नहीं अनेक हैं और प्रत्येक सत्य अपने आप में अपूर्ण है। सत्य की बहुलता एक समस्या है तो इसका समाधान तुलना है। समाजशास्त्र तुलना करके पूर्वाग्रह से मुक्त ही नहीं होता परन्तु औरों के पूर्वाग्रहों को पहचानने की क्षमता विकसित करने का वादा करता है। सहज ज्ञान या सहज बोध सहायक है-समाजशास्त्र का ज्ञान प्राप्त करते समय आम तौर पर छात्रों को डर नहीं लगता है क्योंकि इसकी विषय-वस्तु के बारे में पहले से बहुत कुछ पता होता है।
प्रश्न 4. उपनिवेशवाद से आपका क्या तात्पर्य है? उपनिवेश से पहले भारत की आर्थिक व्यवस्था को समझाइए ।
उत्तर- उपनिवेशवाद से तात्पर्य है, कि किसी देश द्वारा किसी दूसरे देश पर अपना साम्राज्य फैलाना या अधिकार करना जिसमें उपनिवेशकर्ता देश के लाभ के लिए उस उपनिवेश का तरह-तरह से शोषण करता है। उस पर अपना शासन बनाए रखने में अधिक रुचि लेता है। उपनिवेश से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था भारत एक समृद्धशाली देश था, भारतीय आर्थिक व्यवस्थाएँ प्राथमिक तौर पर गैर-बाजारी विनिमय के आधार पर संगठित थीं। गाँवों में गैर-बाजारी विनिमय व्यवस्था अर्थव्यवस्था के एक बड़े तन्त्र का हिस्सा थे जिससे कृषि उत्पाद और अन्य वस्तुओं का व्यापारिक प्रचलन था। भारत हथकरघा निर्मित वस्तुओं का मुख्य निर्माता था। भारत में उन्नत अवस्था में कृषि और व्यापार होता था। पारम्परिक समुदाय या जातियों की अपनी कर्ज और बैंक व्यवस्थाएँ थीं। उपनिवेश काल से पहले भारत एक समृद्ध राज्य था
प्रश्न 5. समाजीकरण की प्रमुख संस्थाएँ कौन-सी है, जिनके माध्यम से हम. सामाजिक नक्शा तैयार करते हैं?
उत्तर– समाजीकरण की प्रमुख संस्थाएँ-
(1) परिवार बच्चा सबसे पहले परिवार में ही जन्म लेता है। माँ के त्याग और पिता को संरक्षा में रहते हुए काफी कुछ सीख जाता है और उसके व्यक्तित्व का विकास होता है, साथ ही समाजीकरण भी।
(2) जाति तथा वर्ग व्यक्ति के समाजीकरण में जाति तथा वर्ग का भी महत्वपूर्ण योग – होता है। जाति जन्म के आधार पर सामाजिक संस्तरण और खण्ड – विभाजन की वह गतिशील व्यवस्था है जो खाने-पीने, विवाह, पेशा और सामाजिक सहवासों में अनेक या कुछ प्रतिबन्धों को अपने सदस्यों पर लागू करती है। इसी प्रकार वर्ग व्यवस्था भी व्यक्ति को सामाजिक स्थिति प्रदान करती है।
(3) धार्मिक, आर्थिक व राजनैतिक संस्थाएँ व्यक्ति के सामाजिक नक्शे में धार्मिक, आर्थिक और राजनैतिक संस्थाओं का भी महत्त्वपूर्ण योगदान होता है, क्योंकि धर्म का प्रभाव व्यक्ति के सामाजिक व्यक्तित्व के विकास पर पड़ता है। धर्म के माध्यम से अनेक उपदेश व निर्देश देते हैं, जिनसे सामाजिक व्यवहार पनपता है। विभिन्न राजनैतिक क्रियाओं, राजनैतिक दलों के कार्य-कलापों और आम चुनावों आदि में भाग लेकर निरन्तर नए अनुभव प्राप्त होते हैं। इसी प्रकार आर्थिक संस्थाएँ, आर्थिक आवश्यकताओं को पूर्ण करती हैं जिससे व्यक्ति ईमानदारी या बेइमानी सहयोग प्रतिस्पर्धा आदि गुणों को सीखता है।
(4) शिक्षण संस्थाएँ शिक्षण संस्थाएँ अर्थात् स्कूल, कॉलेज आदि भी समाजीकरण की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण संस्थाएँ हैं। इन्हीं संस्थाओं में बच्चे की मानसिक क्षमताओं का विकास होता है। वहाँ वह अनेक प्रकार के बच्चों एवं व्यक्तियों के सम्पर्क में आता है और उनसे बहुत कुछ सीखता है। बालक अपने शिक्षकों में से किसी एक शिक्षक को अपना आदर्श मान सकता है और उसी के अनुरूप अपने जीवन को ढाल सकता है।

