Chapter 2 The Demographic Structure of Indian Society

अध्याय   2

भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना [The Demographic Structure of Indian Society]

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • जनसंख्या का सुव्यवस्थित अध्ययन जनांकिकी कहलाता है।
  • जनसांख्यिकीय का अंग्रेजी पर्याय डैमोग्राफी यूनानी भाषा के दो शब्दों ‘डेमोस’ लोग तथा ‘ग्राफीन’ यानि वर्णन से मिलकर बना है, जिसका तात्पर्य है- ‘लोगों का वर्णन’।
  • इसमें जन्म, मृत्यु, प्रवसन, लिंग अनुपात आदि का अध्ययन किया जाता है।
  • जनांकिकी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है-
  • आकारिक जनसांख्यिकी (इसमें जनसंख्या के आकार का अध्ययन किया जाता है),
  • सामाजिक जनसांख्यिकी (इसमें जनसंख्या के सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक पक्षों पर विचार किया जाता है)। जनसांख्यिकीय आँकड़े, राज्य की नीतियों, आर्थिक विकास, जनकल्याण सम्बन्धी नीतियाँ बनाने व कार्यान्वित करने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
  • थॉमस रॉबर्ट माल्थस ने जनसंख्या वृद्धि का सिद्धान्त प्रतिपादित किया।
  • जनसंख्या वृद्धि सिद्धान्त का विस्तार ज्यामितीय या गुणोत्तर रूप से होता है।
  • खाद्य उत्पादक में वृद्धि गणितीय (समान्तर) रूप से बढ़ती है।
  • जनसांख्यिकी संक्रमण का सिद्धान्त-जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के समग्र स्तरों से जुड़ी होती है। जनसंख्या वृद्धि के तीन बुनियादी चरण होते हैं-
  • पहला चरण है, समाज में जनसंख्या वृद्धि का कम होना, क्योंकि समाज तकनीकी दृष्टि से पिछड़ा होता है।
  • दूसरे चरण में जनसंख्या विस्फोट संक्रमण अवधि में होता है, क्योंकि समाज पिछड़ी अवस्था से उन्नत अवस्था में जाता है, इस दौरान जनसंख्या वृद्धि की दरें बहुत ऊँची हो जाती हैं।
  • तीसरे चरण में विकसित समाज में जनसंख्या वृद्धि की दर नीची रहती है क्योंकि ऐसे समाज में मृत्यु दर और जन्म दर दोनों ही काफी कम हो जाती हैं। जन्म-दर- एक वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों पर जीवित जन्मे बच्चों की संख्या जन्म दर कहलाती है।
  • मृत्यु दर क्षेत्र विशेष में प्रति हजार व्यक्तियों में मृत व्यक्तियों की संख्या मृत्युदर कहलाती है।
  • लिंग अनुपात प्रति हजार पुरुषों पर निश्चित अवधि के दौरान स्त्रियों की संख्या लिंग अनुपात कहलाती है।
  • कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों का अनुपात जनसंख्या की आयु संरचना कहलाता है।
  • जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण हेतु राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम अपनाये जाते हैं।

Chapter 2 The Demographic Structure of Indian Society

पाठान्त प्रश्नोत्तर

 

प्रश्न 1. जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धान्त के बुनियादी तर्क को स्पष्ट कीजिए। संक्रमण अवधि ‘जनसंख्या विस्फोट’ के साथ क्यों जुड़ी है?

उत्तर- जनसांख्यिकीय संक्रमण एक जनसंख्या सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के प्रतिपादक डब्ल्यू. एम. थॉम्पसन 1929 और फ्रेंक डब्ल्यू, नोएस्टीन हैं। यह संक्रमण सिद्धान्त उच्च प्रजनन दर से न्यून प्रजनन दर और उच्च मृत्यु दर से न्यून मृत्यु दर क जनसांख्यिकीय प्रतिमान को दर्शाता है। जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास के सभी स्तरों से जुड़ी होती है। जनसंख्या वृद्धि की तीन आधारभूत अवस्थाएँ होती हैं

(i) प्रथम अवस्था – यह उच्च जन्म दर एवं उच्च मृत्यु दर की धीमी जनसंख्या वृद्धि दर की अवस्था है। यह ऐसे देशों की विशेषता है, जहाँ समाज का ढाँचा परम्परावादी है। सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के कारण इस प्रकार के समाजों में उच्च जन्म दर व उच्च मृत्यु दर मिलती है।

(ii) द्वितीय अवस्था – उच्च जन्म दर एवं घटती मृत्यु दर इस अवस्था की विशेषता है। चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से मृत्यु-दर में तो कमी होती है परन्तु सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में विशेष अन्तर नहीं होने के कारण जन्म-दर में अपेक्षित कमी नहीं आ पाती, इस अवस्था वाले देशों में खाद्यान्न की कमी प्रमुख समस्या होती है।

(iii) तृतीय अवस्था – यह जनसंख्या वृद्धि में ह्रास की प्रवृत्ति की अवस्था है। साक्षरता में प्रसार, छोटे परिवार के प्रति जागरूकता एवं बढ़ते हुए सामाजिक आर्थिक विकास के कारण जन्म दर में कमी आती है तथा मृत्यु दर भी घटती जाती है। इस अवस्था में धीमी जनसंख्या वृद्धि होती है। संक्रमण अवधि इस अवस्था में जनसंख्या वृद्धि की दर काफी ऊँची होती है जबकि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण तथा आधुनिक चिकित्सा तकनीक के कारण मृत्यु-दर मे कमी आती है। उच्च वृद्धि दर के कारण बुनियादी सेवाओं तथा खाद्यान्न की कमी, अशिक्षा, बेरोजगारी आदि समस्याएँ जन्म ले लेती हैं इसलिए संक्रमण अवधि जनसंख्या विस्फोट से जुड़ी है।

 

प्रश्न 2. माल्थस का यह विश्वास क्यों था कि अकाल और महामारी जैसी विनाशकारी घटनाएँ, जो बड़े पैमाने पर मृत्यु का कारण बनती हैं, अपरिहार्य हैं?

उत्तर- अंग्रेज राजनीतिक अर्थशास्त्री थॉमस रॉबर्ट माल्थस का मानना था कि जनसंख्या वृद्धि का विस्तार ज्यामितीय या गुणोत्तर रूप से (जैसे- 2, 4, 8, 16, 32 आदि की श्रृंखला में) होता है वहीं कृषि का उत्पादन अंकगणितीय रूप से (जैसे- 2, 4, 6, 8, 10 आदि की तरह) होता है। चूँकि जनसंख्या की वृद्धि की दर भरण-पोषण के संसाधनों के उत्पादन में होने वाली वृद्धि की दर से सदा आगे रहती है। इसलिए जनसंख्या की वृद्धि को नियन्त्रित करने के लिए कृत्रिम तथा प्राकृतिक निरोध अत्यावश्यक हैं। माल्थस का विश्वास था कि जनसंख्या पर नियन्त्रण का प्राकृतिक निरोध; जैसे अकाल, बीमारियाँ, प्राकृतिक आपदाएँ इत्यादि अवश्वंभावी हैं। यह खाद्य आपूर्ति तथा जनसंख्या वृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करने का प्राकृतिक तरीका है। प्राकृतिक निरोध काफी कष्टकारी तथा कठिन होते हैं। यद्यपि यह जनसंख्या तथा आजीविका के बीच संतुलन के लिए अपरिहार्य हैं।

 

प्रश्न 3. मृत्यु-दर और जन्म दर का क्या अर्थ है? कारण स्पष्ट कीजिए कि जन्म-दर में गिरावट अपेक्षाकृत धीमी गति से क्यों आती है जबकि मृत्यु दर बहुत तेजी से गिरती है।

उत्तर- जनांकिकी के अध्ययन में जन्म दर तथा मृत्यु दर का विशेष महत्त्व होता है।। जन्म-दर- एक निर्धारित अवधि के दौरान किसी क्षेत्र में एक हजार व्यक्तियों के पीछे जितने बच्चे जन्म लेते हैं। उसे जन्म-दर कहते हैं। मृत्यु-दर- एक निर्धारित अवधि के दौरान प्रति एक हजार व्यक्तियों के पीछे मरने वाले व्यक्तियों की संख्या को मृत्यु दर कहते हैं। जन्म-दर पर मुख्य रूप से विवाह की आयु, प्रजनन क्षमता, वातावरण की स्थितियों, सामाजिक स्थितियों, धार्मिक विश्वासों तथा शिक्षा का प्रभाव पड़ता है। इसलिए यह उच्च बना रहता है। जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य के विभिन्न उपाय तथा चिकित्सीय प्रगति मृत्यु दर को नियन्त्रित कर लेती है प्रत्येक व्यक्ति उच्च श्रेणी की बेहतर चिकित्सा तथा तकनीकी सेवाओं का सहारा लेता है। अतः जन्म दर का सम्बन्ध चूंकि लोगों की मनोवृत्ति, विश्वास तथा मूल्य से है इसलिए जन्म-दर में गिरावट अपेक्षाकृत धीमी गति से होती है और मृत्यु दर बहुत तेजी से गिरती है।

 

प्रश्न 4. भारत में कौन-कौन-से राज्य जनसंख्या संवृद्धि के ‘प्रतिस्थापन स्तरों’ को प्राप्त कर चुके हैं अथवा प्राप्ति के बहुत नजदीक है? कौन-से राज्यों में अब भी जनसंख्या संवृद्धि की दरें बहुत ऊँची हैं? आपकी राय में इन क्षेत्रीय अन्तरों के क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर- प्रतिस्थापन स्तर वह होता है जब जन्म-दर और मृत्यु दर के बीच बहुत कम अन्तर रह जाने से जनसंख्या स्थिर हो जाती है। जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख सम्बन्ध जन्म-दर अथवा प्रजनन दर से है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जन्म दर एक-दूसरे से बहुत भिन्न देखने को मिलती है। यहाँ केरल और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जिनमें एक स्त्री औसतन 1-7 बच्चों को ही जन्म देती है। इसका अर्थ है कि यहाँ जन्म दर जनसंख्या के प्रतिस्थापन स्तर अथवा स्थिरता के स्तर से भी कम है। अनेक दूसरे राज्य ऐसे हैं जिनमें जन्म दर काफी कम है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, हिमाचल प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल इसी तरह के राज्य हैं। इसके विपरीत बिहार, उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बहुत अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में आज भी जन्म दर अधिक है। भारत में आज प्रतिवर्ष औसत जन्म दर 2-4 है, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में यह क्रमश: 39, 3.7 तथा 3-3 है। जनसंख्याविदों के अनुसार जन्म दर 2-1 होने से ही इसे प्रतिस्थापन स्तर पर लाया जा सकता है।

प्रतिस्थापन स्तरों तथा जनसंख्या संवृद्धि की दरों में क्षेत्रीय विभिन्नताएँ-

(1) विभिन्न राज्यों की सामाजिक परिस्थितियाँ भिन्न-भिन्न हैं; जैसे- आतंकवाद, युद्ध जैसी स्थिति, उपद्रव की स्थिति आदि ।

(2) विभिन्न राज्यों के सामाजिक-सांस्कृतिक संस्कार लोगों का धार्मिक विश्वास है कि बच्चे ईश्वरीय देन हैं इसलिए वहाँ संवृद्धि दर उच्च है।

(3) जो राज्य साक्षर हैं वहाँ संवृद्धि दर कम है जबकि जहाँ साक्षरता की कमी है, अज्ञानता है वहाँ संवृद्धि दर अधिक है।

(4) अतः सामाजिक, आर्थिक व भौगोलिक परिस्थितियाँ जनसंख्या वृद्धि दर को प्रभावित करती हैं।

 

प्रश्न 5. जनसंख्या की ‘आयु संरचना’ का क्या अर्थ है? आर्थिक विकास और संवृद्धि के लिए इसकी क्या प्रासंगिकता है?

उत्तर- जनसंख्या की आयु संरचना का अर्थ है-किसी देश की आबादी की आयु संरचना अर्थात् विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों का अनुपात। इस अनुपात में तीन आयु वर्ग लिए जाते हैं- (i) 0-14 वर्ष – आश्रित वर्ग अर्थात् बच्चे।

(ii) 15 से 59 वर्ष – कार्यशील वर्ग अर्थात् युवा।

(iii) 60 वर्ष तथा उससे ऊपर- पराश्रितता वर्ग अर्थात् बुजुर्ग। निम्नलिखित सारणी से भारतीय जनसंख्या की आयु संरचना को समझा जा सकता है-

 

वर्ष 0-14 वर्ष 15 से 59 वर्ष 60+ वर्ष
1961 41 53 6
1971 42 53 5
1981 40 54 6
1991 38 56 7
2001 34 59 7
2011 29 63 8
2026 23 64 12

 

इस सारणी से पता चलता है कि भारत देश में कार्यशील वर्ग सबसे अधिक है। 1961-2011 तक 15 से 59 वर्ष की आयु वाले लोगों का प्रतिशत 53 से बढ़कर 63 हो गया। इसके बाद आश्रित वर्ग की संख्या लगातार कम हो रही है। 1961-2011 तक बच्चों का प्रतिशत 41% से 29% हो गया। सबसे अन्त में पराश्रितता वर्ग जो कि 1961-2011 में 6% से 8% हो गया। इसका अर्थ यह है कि भारत में जन्म-दर में क्रमशः गिरावट आ रही है। और जीवन प्रत्याशा लगभग 63 वर्ष है जिस कारण इनकी संख्या कम है। आर्थिक विकास तथा संवृद्धि में आयु संरचना की प्रासंगिकता इसका वर्णन निम्नलिखित है-

(i) परिवार नियोजन की आवश्यकता को समझा जाने लगा है। 0-14 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों के प्रतिशत में गिरावट यह प्रदर्शित करती है कि राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का उपयुक्त ढंग से कार्यान्वयन हुआ है। भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन तथा आर्थिक संवृद्धि के कारण जनसंख्या की आयु संरचना एक सकारात्मक युवा भारत की तरफ उन्मुख हो रही है।

(ii) आर्थिक विकास तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार ने जीवन प्रत्याशा में वृद्धि की है ।

(iii) पराश्रितता अनुपात घट रहा है तथा कार्यशील जनसंख्या में वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संवृद्धि का संकेत दे रही है।

(iv) चिकित्सा विज्ञान की प्रगति, सार्वजनिक स्वास्थ्य के विभिन्न उपायों तथा पोषण के कारण जीवन की प्रत्याशा बढ़ी है। यह आर्थिक विकास तथा संवृद्धि के कारण ही सम्भव हुआ है।

 

प्रश्न 6. ‘स्त्री-पुरुष अनुपात’ का क्या अर्थ है? एक गिरते हुए स्त्री-पुरुष अनुपात के क्या निहितार्थ है? क्या आप यह महसूस करते हैं कि माता पिता आज भी बेटियों की बजाय बेटों को अधिक पसन्द करते हैं? आप की राय में इस पसन्द के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर- स्त्री-पुरुष अनुपात का तात्पर्य है कि प्रति 1000 पुरुषों के अनुपात में स्त्रियों की संख्या कितनी है ? इससे एक निश्चित समय पर समाज में स्त्री-पुरुषों के बीच संख्यात्मक समानता का आंकलन किया जाता है, जोकि जनसंख्या में लिंग-संतुलन का महत्त्वपूर्ण सूचक है। ऐतिहासिक रूप से विश्व के अधिकांश देशों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या अधिक है क्योंकि बालिका शिशुओं में बाल शिशुओं की अपेक्षा रोग प्रतिरोधक क्षमता तथा बीमारियों से प्रतिरोध करने की क्षमता अधिक होती है। परन्तु पिछली एक शताब्दी से भी अधिक वर्षों से भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में बड़े पैमाने पर लगातार कमी आ रही है। 21 वीं शताब्दी में प्रति 1000 पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या घटकर 933 रह गई है। राज्य स्तर पर बाल लिंगानुपात भी चिंताजनक है। कम-से-कम 6 राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों में बाल लिंगानुपात 793 से भी कम है। सर्वाधिक बाल लिंगानुपात सिक्किम (986) में है। जी हाँ, दुर्भाग्य से भारत में अभी भी माता-पिता बालकों / लड़कों को प्राथमिकता देते    हैं। इसके अग्रलिखित कारण हो सकते हैं-

(1) सामाजिक तथा सांस्कृतिक कारण-         कृषिगत समाज होने के कारण ग्रामीण जनसंख्या कृषि की देखभाल के लिए बालकों को अधिमान्यता देते हैं। केवल बेटा ही परिवार का वारिस माना जाता है तथा वंश को आगे बढ़ाने की इच्छा लोगों को लड़का प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।

(2) धार्मिक तथा सांस्कृतिक   -विश्वास ऐसा माना जाता है कि केवल बेटा हो अपने माता-पिता की अंत्येष्टि तथा उनसे सम्बद्ध रीति-रिवाजों को करने का हकदार है। आज भी बेटा प्राप्त करने के लिए बलि दी जाती है।

(3) आर्थिक कारण- भारतीय समाज का प्रमुख पेशा कृषि है। ग्रामीणों का ऐसा मानना है, कृषिगत सम्पत्ति लड़कियों को नहीं दी जा सकती, क्योंकि शादी के बाद वे दूसरे गाँव, शहर या नगर में चली जाएँगी। (4) जागरूकता तथा शिक्षा का अभाव -अज्ञानता तथा संकुचित प्रवृत्ति के कारण भारतीय समाज में लोग स्त्री को समान दर्जा नहीं देते। वे सोचते हैं कि बुढ़ापे में उनका बेटा ही सहारा होगा। केवल बेटा ही उनके खाने-पीने, आवास, परम्पराओं तथा अन्य जिम्मेदारियों को निभा सकता है।

(5) सामाजिक कुरीतियाँ-   कई लोग सोचते हैं कि बेटी के विवाह पर बहुत-सा दहेज देना पड़ेगा तथा विवाह के पश्चात् भी बहुत कुछ देना पड़ेगा। परन्तु बेटे के साथ तो दहेज आएगा। इस कारण बेटी की अपेक्षा बेटे को प्राथमिकता देते हैं।

निष्कर्ष – यदि निम्न शिशु लिंगानुपात जारी रहा तो यह हमारी सामाजिक संरचना पर बहुत ही बुरा प्रभाव छोड़ेगा विशेष तौर से विवाह जैसी संस्थाओं पर ।

 

परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1.भारत में सर्वप्रथम किस वर्ष में जनगणना शुरू की गई ?

(A) सन् 1870,                                            (B) सन् 1872,

(C) सन् 1891,                                             (D) सन् 1901।

प्रश्न 2. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या है-

(A) 940,                                                 (B) 927,

(C) 936,                                                  (D) 930.

प्रश्न 3. भारत में पहली राष्ट्रीय जनसंख्या नीति किस सन् में घोषित की गई ?

(A) सन् 1980,                                                (B) सन् 1960,

(C) सन् 1976,                                                 (D) सन् 1965.

प्रश्न 4.भारत में प्रतिवर्ष जनसंख्या में लगभग कितनी वृद्धि हो जाती है ?

(A) 1.50 करोड़,                                           (C) 1.90 करोड़,

(B) 1.70 करोड़,                                            (D) 2-10 करोड़ ।

प्रश्न 5.जनांकिकी शब्द का प्रयोग सबसे पहले जिस लेखक द्वारा किया गया, उसका नाम है-

(A) सोरोकिन,                                                 (B) माल्थस,

(C) गुइलार्ड,                                                     (D) कॉम्टे ।

प्रश्न 6.भारत में किस प्रदेश में साक्षरता का प्रतिशत सबसे अधिक है?

(A) महाराष्ट्र,                                           (C) गुजरात,

(B) तमिलनाडु,                                        (D) केरल।

प्रश्न 7. समुदाय वह छोटा स्थानीय समूह है, जिसमें सामाजिक जीवन के सभी पहलू सम्मिलित होते हैं।” यह कथन है-

(A) मार्टन का,                                   (C) बीरस्टीड का,

(B) किंग्सले डेविस का,                      (D) मैकाइवर का ।

प्रश्न 8.विश्व में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है-

(A) भारत,                                   (C) अमेरिका,

(B) चीन,                                     (D) ब्राजील।

प्रश्न 9.जनसंख्या संवृद्धि दर का तात्पर्य है-

(A) जन्म दर और मृत्यु दर के बीच का अन्तर,

(B) स्त्री एवं पुरुष के बीच का अन्तर,

(C) ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या के बीच का अन्तर,

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं।

प्रश्न 10.भारत के किस राज्य में सर्वाधिक स्त्री-पुरुष अनुपात है?

(A) पंजाब,                                             (C) राजस्थान,

(B) हरियाणा,                                             (D) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 11.भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का कितना प्रतिशत है?

(A) 15.5,                                                    (C) 19.5,

(B) 17.5,                                                   (D) 21-51

प्रश्न 12.भारत में सबसे कम जनसंख्या वाला राज्य कौन-सा है ?

(A) मिजोरम,                                               (B) मेघालय,

(C) उत्तर प्रदेश,                                            (D) असम

प्रश्न 13.भारत में सर्वाधिक जनसंख्या वा।ला राज्य कौन-सा है?

(A) बिहार                                              (C) सिक्किम,

(B) पश्चिम बंगाल,                                    (D) मध्य प्रदेश।

प्रश्न 14.सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य कौन-सा है?

(A) बिहार,                                              (C) महाराष्ट्र,

(B) पश्चिम बंगाल,                                    (D) उत्तर प्रदेश।

प्रश्न 15.भारत का न्यूनतम साक्षरता वाला राज्य कौन-सा है?

(A) अरुणाचल प्रदेश,                                           (B) उत्तर प्रदेश,

(C) महाराष्ट्र,                                                        (D) बिहार)

प्रश्न 16.भारत में कुल कितने प्रतिशत लोग साक्षर हैं?

(A) 71%,                                            (C) 73%,

(B) 72%,                                            (D) 74%

प्रश्न 17.भारत का लिंगानुपात कितना है?

(A) 930,                                                 (B) 933,

(C) 940,                                                  (D) 943

प्रश्न 18.स्वतन्त्र भारत की पहली जनगणना कब हुई थी ?

(A) 1950 में,                                            (C) 1952 में,

(B) 1951 में,                                             (D) 1954 में।

प्रश्न 19.जनगणना 2011 का शुभंकर क्या था ?

(A) प्रगणक देश,                                 (C) प्रगणक वाक्य,

(B) प्रगणक शिक्षिका,                          (D) प्रगणक अनुशासन।

प्रश्न 20.जनसंख्या की दृष्टि से चार सबसे बड़े राज्य कौन-से हैं?

(A) उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, सिक्किम,                 (B) उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, गोवा,

(C) उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल,            (D) उत्तर प्रदेश, केरल, बिहार, गोवा ।

 

उत्तर- 1. (B), 2. (A), 3. (C), 4. (B), 5. (C), 6. (D), 7. (B), 8. (B), 9. (A). 10. (A), 11. (B), 12. (C), 13. (C), 14. (A), 15. (D), 16. (D), 17. (C), 18. (B), 19. (B), 20. (C).

 

रिक्तस्थानपूर्ति

 

  1. जनांकिकी में————और जनसंख्या अध्ययन के संख्यात्मक और गुणात्मक पक्षों mका अध्ययन किया जाता है।
  2. आदर्श जनसंख्या सिद्धान्त—————- को भी कहते हैं।
  3. भारत में जनसंख्या प्रतिवर्ष ———— प्रतिशत बढ़ रही है।
  4. भारत में वर्तमान में 72% जनसंख्या——————–में निवास करती है।
  5. भारत की राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 के अनुसार———————वर्ष तक जनसंख्या स्थिरता प्राप्त करने का लक्ष्य है।
  6. 2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक कुल शहरी जनसंख्या वाला राज्य है। \
  7. वर्ष —————–को भारतीय जनसंख्या के इतिहास में महान विभाजक वर्ष कहा जाता है।
  8. ——————राज्य में महिलाओं में साक्षरता दर सबसे कम है।
  9. भारत की जनसंख्या———– में 100 करोड़ हो गई।
  10. भारत में जनसंख्या वितरण में .—…….. है।

 

उत्तर- 1. जनांकिकी विश्लेषण, 2. माल्यस सिद्धान्त, 3. 17-64, 4. गाँवों, 5.2045, 6. महाराष्ट्र, 7. 1921, 8. राजस्थान, 9 मई 2000, 10. विषमता।


[D]                                                सत्य / असत्य

 

  1. विश्व की कुल जनसंख्या का 1/4 भाग भारत में निवास करता है।
  2. नगरीय जीवन की एक विशेष विधि है।
  3. ग्रामीण नगरीय सातत्य एक आधुनिक प्रक्रिया है।
  4. जनसंख्या संरचना का बहुत बड़ा सरोकार सामाजिक और आर्थिक कारकों से है।
  5. भारत की जीवन प्रत्याशा विगत वर्षों में घटी है।
  6. ऊँची मृत्यु-दर अर्द्ध-विकसित अर्थव्यवस्था का संकेतक है।
  7. ग्रामीण लोगों का प्रकृति से सीधा सम्बन्ध होता है।
  8. जनसंख्या के तीन महत्त्वपूर्ण घटक जन्म-दर, मृत्यु-दर और प्रवास हैं।
  9. नैसर्गिक प्रतिबन्ध प्रो. डॉल्टन की अवधारणा है।
  10. परिवार नियोजन जनसंख्या नियन्त्रण का प्रमुख उपाय है।

 

 उत्तर- 1. असत्य, 2. सत्य, 3. सत्य, 4. सत्य, 5. असत्य, 6. सत्य, 7. सत्य, 8. सत्य, 9. असत्य, 10. सत्य ।


10                                               जोड़ी मिलाइए

 

    1. नगरीय समुदाय                                                        (i) मजूमदार तथा मदान
    2. जाति एक बन्द वर्ग है                                                    (ii) जनसंख्या का आकार व घनत्व
    3. जनांकिकीय समुदाय                                                    (iii) जजमानी व्यवस्था
    4. ग्रामीण समुदाय                                                            (iv) श्रम विभाजन तथा विशेषीकरण
    5. ग्रामीण – नगरीय निरन्तरता                                           (v) सामाजिक गतिशीलता
    6. नगर                                                                              (vi) बटैण्ड ने

उत्तर- 1. (v), 2. (i), 3. (ii), 4. (iii) 5. (vi), 6. (iv)।

 

    1. जनसंख्या में वृद्धि का क्रम                                           (i) न्यूनतम जनसंख्या घनत्व वाला राज्य
    2. जनसंख्या सिद्धान्तकार                                                 (ii) सर्वाधिक साक्षरता दर वाला राज्य
    3. धूण हत्या का सम्बन्ध                                                    (iii) सर्वाधिक मृत्यु वाला राज्य
    4. केरल                                                                          (iv) बालिका शिशु से
    5. ओडिसा                                                                       (v) माल्थस
    6. अरुणाचल प्रदेश                                                          (vi) ज्यामितीय रूप

उत्तर- 1. (vi), 2. (v), 3. (iv), 4. (ii) 5. (iii) 6. (i) 1


एक शब्द/वाक्य में उत्तर

 

  1. जनसांख्यिकी का सर्वाधिक प्रसिद्ध सिद्धान्त किस राजनीतिक अर्थशास्त्री के नाम से जुड़ा है?
  2. जनसंख्या के विज्ञान को क्या कहते हैं?
  3. किसी भी समाज में सामाजिक आर्थिक विकास का केन्द्र क्या होता है?
  4. सबसे कम मृत्यु दर किस राज्य में है?
  5. अंग्रेजी पर्याय डेमोग्राफी यूनानी भाषा के किन दो शब्दों में मिलकर बना है?
  6. भारत के किस राज्य में शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक है?
  7. राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का अध्यक्ष कौन है ?
  8. प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या को क्या कहा जाता है ?
  9. भारत में वर्तमान में लागू राष्ट्रीय जनसंख्या नीति कब से लागू हुई ?
  10. भारत की जनगणना का प्रारम्भ कब से हुआ ?
उत्तर- 1. थॉमस रॉबर्ट माल्थस, 2. जनांकिकी, 3. जनसंख्या, 4. केरल, 5. डेमोस और ग्राफीन, 6. मध्य प्रदेश, 7. प्रधानमन्त्री, 8. लिंगानुपात 9. सन् 2000 से, 10. सन् 18721

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. जनांकिकी का अर्थ समझाइए।

उत्तर- जनांकिकी वह विज्ञान है जो किसी समाज की जनसंख्या के आकार, घनत्व तथा उसमें होने वाली वृद्धि अथवा कमी से सम्बन्धित परिवर्तनों को स्पष्ट करता है। इसे जनसांख्यिकी भी कहा जाता है।

प्रश्न 2. जनांकिकी की तीन प्रमुख शाखाओं के नाम लिखिए।

उत्तर- (1) औपचारिक जनांकिकी, (2) सामाजिक जनांकिकी, तथा (3) आर्थिक जनांकिकी ।

प्रश्न 3. भारत की सामाजिक जनांकिकी के क्या लक्षण हैं?

उत्तर- (1) जनसंख्या वृद्धि की दर (2) लिंगानुपात (3) आयु संरचना, (4) जन घनत्व आदि सामाजिक जनांकिकी के लक्षण है।

प्रश्न 4. जनांकिकी की कोई दो उपयोगिता बताइए।

उत्तर–(1) समाज में सामाजिक-आर्थिक विकास का केन्द्र जनसंख्या होती है। इस के आधार पर हम अपने साधनों का सही मूल्यांकन कर सकते हैं। (2) रोजगार के अवसरों में वृद्धि का आधार जनसंख्या होती है।

प्रश्न 5. जनांकिकी के महत्त्व को समझाइए ।

उत्तर- जनांकिकी का महत्त्व – (1) जनसंख्या सम्बन्धी सभी कार्यक्रमों का निर्माण (2) भविष्य में जनसंख्या के आकार का अनुमान । (3) सामाजिक समस्याओं का समाधान।

प्रश्न 6. माल्थस का जनसंख्या वृद्धि सिद्धान्त क्या है?

उत्तर- माल्थस के अनुसार, जनसंख्या का विस्तार ज्यामितीय रूप से होता है वहीं कृषि का उत्पादन गणितीय रूप से होता है। चूँकि जनसंख्या की वृद्धि की दर भरण-पोषण के वि संसाधनों में होने वाली वृद्धि की दर से सदैव आगे रहती है इसलिए समृद्धि को बढ़ाने के लिए नि जनसंख्या की वृद्धि को नियन्त्रित किया जाता है।

प्रश्न 7. भारत में जनसंख्या वृद्धि के चार कारण लिखिए।

उत्तर- (1) अशिक्षा, (2) निम्न जीवन स्तर, (3) बाल विवाह की प्रथा, (4) संयुक्तपरिवार ।

प्रश्न 8. जनसंख्या विस्फोट किसे कहते हैं?

उत्तर- जब किसी देश की जनसंख्या की मृत्यु दर में कमी होती है, बाल मृत्यु-दर उ में कमी होती है लेकिन जन्म-दर और जीवन प्रत्याशा में वृद्धि होती है तो इन सबके संयुक्त प्र प्रभाव के कारण जनसंख्या में बहुत तेजी से वृद्धि होती है, इस स्थिति को ही जनसंख्या विस्फोट ( कहा जाता है।

प्रश्न 9. अकाल के क्या कारण थे?

उत्तर- मुस्लिम आक्रमणकारियों एवं अंग्रेजों के भारत में आगमन से भारत की क अर्थव्यवस्था का सर्वनाश हो गया। अंग्रेजों द्वारा किसानों से अफीम व नील की खेती कराये में जाने के कारण देश में अनाज की कमी हो गई जो अकाल का प्रमुख कारण बनी

प्रश्न 10. जन्म-दर एवं मृत्यु दर को समझाइए ।

उत्तर – जन्म-दर- एक वर्ष में प्रति 1000 जनसंख्या में घटित होने वाली लेखबद्ध जीवितजात संख्या जन्म-दर कहलाती है। मृत्यु-दर- प्रति 1000 जीवित जन्मे शिशुओं में से एक वर्ष या इससे कम उम्र में मर क गए शिशुओं की संख्या मृत्यु-दर कहलाती है।

प्रश्न 11. प्रतिस्थापन-स्तर किसे कहते हैं?

उत्तर—प्रतिस्थापन-स्तर वह होता है जब जन्म-दर   और मृत्यु दर के बीच बहुत कम अन्तर रह जाने से जनसंख्या स्थिर हो जाती है।

प्रश्न 12. आयु संरचना से क्या तात्पर्य है?

उत्तर – किसी समाज की कुल जनसंख्या के विभिन्न आयु वर्गों में व्यक्तियों काअनुपात आयु संरचना कहलाती है।

प्रश्न 13. स्त्री-पुरुष लिंगानुपात क्या है?

उत्तर- प्रति एक हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या स्त्री-पुरुष लिंगानुपात कहलाताn है। जनगणना 2011 के अनुसार भारत का लिंगानुपात 940 है।

प्रश्न 14. नगरीय समुदाय से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- नगरीय समुदाय एक ऐसा समुदाय है जिसमें जनसंख्या का घनत्व बहुत अधिक होता है; जिसमें विभिन्न धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों, व्यवसायों के व्यक्ति एक साथ रहते हैं। यहाँ परिवहन और संचार की सुविधाएँ तथा बड़े-बड़े कारखाने और उद्योग विकसित होते हैं।

प्रश्न 15. भारत में परिवार नियोजन किस वर्ष से आरम्भ हुआ?

उत्तर- भारत में स्वतन्त्रता के पश्चात् वर्ष 1949 में परिवार नियोजन कार्यक्रम का गठन के किया गया। वर्ष 1952 में पूरे देश में अन्य विकासशील देशों की तरह भारत में पहला परिवार ए नियोजन कार्यक्रम शुरू किया गया।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. जनांकिकी का अर्थ एवं परिभाषा लिखिए।

उत्तर- जनांकिकी का अर्थ-    जनांकिकी शब्द का प्रयोग सबसे पहले सन् 1855 में गुइलार्ड ने किया था। जनांकिकी अंग्रेजी शब्द ‘Demography” का हिन्दी अनुवाद है, जिसकी हर उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है। ‘Demography ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। प्रथम शब्द ‘Demos’ (डेमोस) जिसका अर्थ होता है मनुष्य और दूसरा शब्द है, ‘Graphien’ ट (ग्राफीन) जिसका अर्थ होता है लिखना या अंकित करना। इस प्रकार जनांकिकी का शाब्दिक अर्थ जनसंख्या के बारे में लिखना या अंकित करना है।

परिभाषा – गुइलाई के अनुसार “जनांकिकी एक गणितीय ज्ञान है जो जनसंख्या की भौतिक, सामाजिक, बौद्धिक एवं नैतिक दशाओं के अध्ययन से सम्बन्धित है। व्यापक अर्थो में यह मानव जाति का प्राकृतिक और सामाजिक इतिहास है।”

प्रश्न 2. जनांकिकी की तीन प्रमुख शाखाएँ कौन-सी हैं?

उत्तर-जनांकिकी की तीन प्रमुख शाखाएँ निम्नलिखित है-

(1) जनांकिकीय संरचना –इसके अन्तर्गत किसी समाज में जनसंख्या के आकार, स्त्री-पुरुष अनुपात, जनसंख्या घनत्व, आयु संरचना एवं ग्रामीण और नगरीय जनसंख्या आदि का अध्ययन किया जाता है।

(2) जनांकिकीय प्रक्रियाएँ- यह जनसंख्या की संरचना में परिवर्तन प्रदर्शित करती है; जैसे- जन्म-दर, मृत्यु दर, प्रवास सम्बन्धी आदि । (3) सामाजिक जनांकिकी जनसंख्या सम्बन्धी विशेषताएँ किस तरह सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 3. भारत में जनांकिकी की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

 

उत्तर- भारत में जनांकिकी की प्रमुख विशेषताएँ-   भारत में जनांकिकी की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1) जनसंख्या का आकार – भारत एक विशाल देश है, जिसमें जनसंख्या का आकारभी बहुत विस्तृत है।

(2) धर्मों और सम्प्रदायों का समावेश भारतीय जनसंख्या में विभिन्न धर्मों और – सम्प्रदायों से सम्बन्धित लोगों का समावेश होता है। यहाँ इस्लाम को मानने वाले लोगों की संख्या 17 करोड़ से भी अधिक है जो परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग करना धर्म के विरुद्ध मानते हैं। अनेक जनजातियों के लोग भी परिवार नियोजन में विश्वास नहीं करते।

(3) साक्षरता स्वतन्त्रता के बाद साक्षरता की दर दोगुनी से अधिक हो जाने के बाद भी भारतीय समाज के परम्परागत सामाजिक ढाँचे में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुए।

(4) मृत्यु-दर-जनसंख्या में शिशु मृत्यु दर आज भी काफी अधिक है। पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का अनुपात कम होने और उन्हें स्वास्थ्य की कम सुविधाएँ मिलने के कारण सामाजिक संरचना में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की स्थिति आज भी कमजोर है।

(5) स्थान परिवर्तन की प्रवृत्ति – जनसंख्या में स्थान परिवर्तन की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है जिससे ग्रामीण जनसंख्या में कमी हो रही है और नगरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

(6) परम्परागत सामाजिक ढाँचे में कोई विशेष परिवर्तन नहीं— स्वतन्त्रता के बाद साक्षरता की दर दोगुनी से अधिक हो जाने के बाद भी भारतीय समाज के परम्परागत ढाँचे में परिवर्तन नहीं है। आज भी नगरीय जनसंख्या की तुलना में ग्रामीण जनसंख्या कहीं अधिक है।

(7) जनसंख्या घनत्व विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व एक-दूसरे से बहुत भिन्न होने के कारण यहाँ की राजनीतिक व्यवस्था पर उन क्षेत्रों का प्रभाव अधिक है, जहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है।

 

प्रश्न 4. भारत में जनसंख्या वृद्धि के क्या कारण हैं?

उत्तर-    (1) अशिक्षा-   भारत में साक्षरता दर केवल 65 प्रतिशत है। अशिक्षा के कारण सामान्य व्यक्ति भविष्य के प्रति सचेत नहीं रहता है।

(2) बाल-विवाह एवं विवाह की अनिवार्यता-           ग्रामीण समुदाय और नगर में रहने वाले निम्न आय वर्ग के लोगों में आज भी बाल-विवाह का प्रचलन है। भारत में विवाह को मोक्ष प्राप्ति के लिए आवश्यक माना गया है।

(3) जन्म-दर एवं मृत्यु-दर में अन्तर – भारत में जन्म दर एवं मृत्यु दर में अत्यधिक अन्तर हो जाने के कारण जनसंख्या में वृद्धि होती जा रही है।

(4) उष्ण जलवायु – भारत की जलवायु उष्ण होने के कारण व्यक्ति शीघ्र परिपक्वता की अवस्था प्राप्त कर लेता है। अन्य देशों की तुलना में स्त्रियों की प्रजनन शक्ति अधिक होने से जन्म दर उच्च रहती है।

 

प्रश्न 5. जनसंख्या वृद्धि के सामाजिक प्रभाव क्या हैं?

उत्तर- जनसंख्या वृद्धि के कारण समाज में विभिन्न बदलाव आते हैं। देश की बढ़ती जनसंख्या से भुखमरी, गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, गंदी बस्तियाँ, आवास की समस्या एवं पारिवारिक तनाव में निरन्तर वृद्धि हो रही है। सामाजिक विघटन के दृष्टान्त समाज में निरन्तर बढ़ रहे हैं।

प्रश्न 6. भारत की जनसंख्या नीति समझाइए ।

उत्तर- सन् 1976 में पहली राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाई गई। इसमें अधिक सफलता न मिलने पर जनसंख्या नीति को भारत के 20 सूत्रीय कार्यक्रम, 1982 का एक अंग बना दिया। गया। सन् 2000 में एक नई राष्ट्रीय जनसंख्या नीति लागू की गई इसमें जनसंख्या पर रोक लगाने के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार पर विशेष बल दिया गया। सरकार को जनसंख्या नीतियों के बार-बार असफल होने पर इसकी कमियों पर ध्यान आकर्षित करना होगा। जिससे उसे सफल बनाने के सुझाव को ढूँढ़ा जा सके। भारत सरकार की जनसंख्या नीति की कमियों निम्नलिखित हैं-

(1) सैद्धान्तिक अधिक भारत सरकार की जनसंख्या नीति सैद्धान्तिक अधिक तथा व्यवहारिक कम है।

 (2) बहुत ऊँचे लक्ष्य-भारत सरकार की जनसंख्या नीति में जन्म-दर में कमी करने के जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, वो काफी ऊँचे हैं।

(3) मौद्रिक प्रलोभन की नीति दोषपूर्ण व अपर्याप्त जनसंख्या नीति में जनसंख्या नियन्त्रण के लिए मौद्रिक प्रलोभनों की घोषणा की गई है। वे आधुनिक मुद्रा स्फीति को देखते हुए हास्यास्पद लगती है।

(4) अनिवार्य नसबन्दी की धारणा का त्याग अनुचित – भारत में तीन सन्तानों के बाद नसबन्दी की अनिवार्यता कानूनी रूप से बाध्य होनी चाहिए, लेकिन यह नीति स्वैच्छिक अधिक व व्यवहारिक कम साबित हुई है।

प्रश्न 7. भारतीय जनसंख्या की आयु संरचना समझाइए ।

उत्तर– भारत एक युवा जनसंख्या वाला देश है। भारत के लोगों की आयु का औसत अधिकांश देशों से कम है। जनसंख्या की आयु संरचना को निम्नलिखित समूहों में रखा गया है-

(1) 0-14 वर्ष के बच्चे,

(2) 15-59 वर्ष (कार्यशील जनसंख्या),

(3) 60 + वर्ष (वृद्ध व्यक्ति) ।

प्रश्न 8. भारत में गिरते स्त्री-पुरुष अनुपात के क्या कारण हैं?

उत्तर- स्त्री-पुरुष अनुपात जनसंख्या में लैंगिक संतुलन का महत्त्वपूर्ण सूचक है। विगत शताब्दी में भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में लगातार गिरावट हो रही है। भारत के पाँच राज्यों और संघ राज्यों के क्षेत्रों में बाल स्त्री-पुरुष अनुपात प्रति 1000 पुरुष के पीछे 900 स्त्रियों से भी कम है। हरियाणा में तो बाल स्त्री-पुरुष अनुपात प्रति 1000 पुरुष के पीछे 885 है। भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट आने के कई कारण हैं, जैसे-शैशवावस्था में बच्चियों की देखभाल की घोर उपेक्षा, लिंग विशेष का गर्भपात, बालिक शिशु की हत्या, गर्भस्थ शिशु का परीक्षण, बालिका भ्रूण को गर्भ में ही नष्ट कर देना। उपर्युक्त कारणों से स्त्री-पुरुष अनुपात लगातार गिर रहा है।

 

प्रश्न 9. साक्षरता सम्पन्न होने का महत्त्वपूर्ण साधन है कैसे ? समझाइए ।

उत्तर – शिक्षित होने के लिए साक्षर होना जरूरी है और साक्षरता ही शक्ति सम्पन्न होने का महत्त्वपूर्ण साधन है। जनसंख्या जितनी अधिक साक्षर होगी आजीविका के विकल्पों के बारे में उतनी ही अधिक जागरूकता उत्पन्न होगी और लोग ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में उतना ही अधिक भाग ले सकेंगे। इसके अलावा साक्षरता से स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूकता आती है तथा समुदाय के सदस्यों की सांस्कृतिक और आर्थिक कल्याण कार्यों में सहभागिता बढ़ती है । स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद साक्षरता के स्तरों में काफी सुधार आया है। हमारी जनसंख्या का दो-तिहाई हिस्सा अब साक्षर है।

 

प्रश्न 10. ग्रामीण और नगरीय समुदाय के विभाजन को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर– भारतीय समाज मुख्य तौर पर गाँवों और नगरों में बँटा हुआ है। इसलिए गाँवों के वर्गों की संरचना व रूप शहरों के वर्गों की संरचना व रूप से भिन्न है।

ग्रामीण और नगरीय समुदाय

क्र. ग्रामीण समुदाय नगरीय समुदाय का विभाजन
1 अधिकांश व्यक्ति कृषि कार्यों से जीविका प्राप्त करते हैं। जीविका उपार्जित करते हैं। अधिकांश लोग गैर-कृषि कार्यों; जैसे-व्यापार, निर्माण कार्य, उद्योग तथा विभिन्न प्रकार की सेवाओं से जीविका प्राप्त करते हैं।
2 व्यक्तियों का जीवन प्राकृतिक दशाओं से अधिक प्रभावित होता है। मनुष्य द्वारा विकसित भौतिक और अभौतिक संस्कृति लोगों के व्यवहारों को प्रभावित करती है ।
3 ग्रामीण जीवन में जनसंख्या का घनत्व काफी कम होता है।

 

नगरीय समुदाय जनसंख्या का घनत्व अधिकहोती है।

 

4 .ग्रामीण समुदाय में लोग अपने क्षेत्र को छोड़कर दूसरे स्थान पर बसना नहीं चाहते। यहाँ श्रम विभाजन और विशेषीकरण बढ़ने के साथ गतिशीलता भी अधिकहोती है।

 

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. जनांकिकी का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन नगरीय समुदायm मनुष्य द्वारा विकसित भौतिक और अभौतिक संस्कृति लोगों के व्यवहारों को प्रभावित करती है। नगरीय समुदाय में जनसंख्या का घनत्व बहुत अधिक होता है। यहाँ श्रम विभाजन और विशेषीकरण बढ़ने के साथ गतिशीलता भी अधिक होती है। कीजिए ।

उत्तर- जनांकिकी का अर्थ –    जनांकिकी शब्द का प्रयोग सबसे पहले सन् 1855 में गुइलार्ड ने किया था। जनांकिकी अंग्रेजी शब्द ‘Demography” का हिन्दी अनुवाद है, जिसकी हर उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है। ‘Demography ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। प्रथम शब्द ‘Demos’ (डेमोस) जिसका अर्थ होता है मनुष्य और दूसरा शब्द है, ‘Graphien’ ट (ग्राफीन) जिसका अर्थ होता है लिखना या अंकित करना। इस प्रकार जनांकिकी का शाब्दिक अर्थ जनसंख्या के बारे में लिखना या अंकित करना है।

भारत में जनांकिकी की प्रमुख विशेषताएँ-  भारत में जनांकिकी की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

(1) जनसंख्या का आकार – भारत एक विशाल देश है, जिसमें जनसंख्या का आकारभी बहुत विस्तृत है।

(2) धर्मों और सम्प्रदायों का समावेश भारतीय जनसंख्या में विभिन्न धर्मों और – सम्प्रदायों से सम्बन्धित लोगों का समावेश होता है। यहाँ इस्लाम को मानने वाले लोगों की संख्या 17 करोड़ से भी अधिक है जो परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग करना धर्म के विरुद्ध मानते हैं। अनेक जनजातियों के लोग भी परिवार नियोजन में विश्वास नहीं करते।

(3) साक्षरता स्वतन्त्रता के बाद साक्षरता की दर दोगुनी से अधिक हो जाने के बाद भी भारतीय समाज के परम्परागत सामाजिक ढाँचे में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुए।

(4) मृत्यु-दर-जनसंख्या में शिशु मृत्यु दर आज भी काफी अधिक है। पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का अनुपात कम होने और उन्हें स्वास्थ्य की कम सुविधाएँ मिलने के कारण सामाजिक संरचना में पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों की स्थिति आज भी कमजोर है।

(5) स्थान परिवर्तन की प्रवृत्ति – जनसंख्या में स्थान परिवर्तन की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है जिससे ग्रामीण जनसंख्या में कमी हो रही है और नगरों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

(6) परम्परागत सामाजिक ढाँचे में कोई विशेष परिवर्तन नहीं— स्वतन्त्रता के बाद साक्षरता की दर दोगुनी से अधिक हो जाने के बाद भी भारतीय समाज के परम्परागत ढाँचे में परिवर्तन नहीं है। आज भी नगरीय जनसंख्या की तुलना में ग्रामीण जनसंख्या कहीं अधिक है।

(7) जनसंख्या घनत्व विभिन्न क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व एक-दूसरे से बहुत भिन्न होने के कारण यहाँ की राजनीतिक व्यवस्था पर उन क्षेत्रों का प्रभाव अधिक है, जहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है।

 

प्रश्न 2. जनांकिकी किस प्रकार सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन से प्रभावित होती है?

उत्तर- जनसंख्या की संरचना और इससे सम्बन्धित प्रक्रियाओं को हम अक्सर औपचारिक जनांकिकी कहते हैं। इसके द्वारा हम केवल जनसंख्या वृद्धि, जनसंख्या के घनत्व, जन्म-दर, मृत्यु दर, स्त्री-पुरुषों के अनुपात, जीवन-अवधि, आयु संरचना और इसी तरह के दूसरे जनसंख्या सम्बन्धित आँकड़ों का अध्ययन करते हैं जब इन विशेषताओं से हम आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के सम्बन्ध को समझते हैं तब इसे सामाजिक जनांकिकी कहा जाता है। जनसंख्या वृद्धि के परिणामों को सामाजिक जनांकिकी के आधार पर ही समझा जा सकता है।

(1) सामाजिक जीवन से सम्बन्ध वर्तमान युग में सामाजिक दशाओं और जनसंख्या सम्बन्धी विशेषताओं के बीच प्रत्यक्ष सम्बन्ध है।

(1) समाज की संरचना के निर्माण में परिवार, वर्ग व्यवस्था, नातेदारी, व्यवहार के नियमों और विश्वासों का बड़ा हाथ होता है। उदाहरण के लिए, सन् 1955 से हिन्दुओं में बहुपत्नी विवाह पर कानून द्वारा रोक लगा दी गई तो समाज के सम्भ्रान्त, उच्च व मध्यम वर्ग में जन्म दर तेजी से कम होने लगी।

(2) सामाजिक मूल्यों का भी जनसंख्या सम्बन्धी विशेषताओं से प्रत्यक्ष सम्बन्ध है। हमारे समाज के मूल्यों के अनुसार जब तक बड़े परिवार और अधिक पुत्रों को अच्छा समझा जाता रहा, तब तक जनसंख्या वृद्धि पर किसी तरह के प्रतिबन्ध लगाना सम्भव नहीं हो सका।

(3) शिक्षा अच्छे जीवन स्तर को महत्त्व देकर जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाती है। जिन समूहों और वर्गों में शिक्षा अधिक है, वहाँ जीवन अवधि बढ़ रही है तथा जन्म दर में कमी आई है।

(4) जनसंख्या वृद्धि का एक मुख्य परिणाम विभिन्न सामाजिक समस्याओं के रूप में देखने को मिलता है; जैसे बेरोजगारी, निर्धनता, पारिवारिक विघटन आदि।

(2) आर्थिक जीवन से सम्बन्ध वर्तमान समाजों में प्रौद्योगिक विकास और संगठित अर्थव्यवस्था के प्रभाव से जन्म-दर कम होने के साथ ही कृषि उत्पादन में वृद्धि होने लगी। नई प्रौद्योगिकी के प्रभाव से जैसे-जैसे परिवहन के साधनों का विकास हुआ, जनसंख्या में स्थान परिवर्तन की प्रवृत्ति बढ़ने लगी। यह आर्थिक विकास की संरचना और जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करने वाला एक मुख्य आधार है।

(3) सांस्कृतिक जीवन से सम्बन्ध एक सांस्कृतिक संस्था के रूप में भारत की जाति-व्यवस्था तथा सांस्कृतिक जीवन के सम्बन्ध को समझना आवश्यक है। विवाह, बाल-विवाह, दहेज प्रथा, बहु-पत्नी विवाह जैसी कुप्रथाएँ भी जनसंख्या की वृद्धि का कारण तथा परिणाम होती हैं। परम्परागत सांस्कृतिक जीवन में शिक्षा पर केवल कुछ उच्च जातियों का एकाधिकार रहने से जनसंख्या का अधिकांश हिस्सा शिक्षा से वंचित रहा। सांस्कृतिक संरचना के असन्तुलन से अनेक ऐसी समस्याएँ पैदा होती हैं जो व्यक्तित्व के विकास में बाधा पैदा करने लगती हैं। अतः स्पष्ट होता है कि किसी भी समाज की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विशेषताएँ जनसंख्या की संरचना को प्रभावित करती हैं।

प्रश्न 3. भारत में जनसंख्या वृद्धि के कारण तथा प्रभाव लिखिए। इसके निवारण के उपाय बताइए।

उत्तर-सन् 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी 1,210,193,422 है, जिसका अर्थ है कि भारत ने एक अरब के आँकड़े को पार कर लिया है। यह चीन के बाद दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। विभिन्न अध्ययनों से यह पता चला है कि सन् 2025 तक भारत चीन को भी पछाड़ देगा और विश्व का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। इस तथ्य के बावजूद कि यहाँ जनसंख्या नीतियाँ, परिवार नियोजन और कल्याण कार्यक्रम सरकार ने शुरू किए हैं और प्रजनन दर में लगातार कमी आई है

   जनसंख्या वृद्धि के कारण  – भारत में आबादी बढ़ने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं-

(1) जन्म दर का प्रतिशत मृत्यु दर से अधिक होना- भारत में मृत्यु दर के प्रतिशत को तो सफलतापूर्वक कम कर दिया है पर यही कार्य जन्म-दर के बारे में नहीं किया जा सकता है। विभिन्न जनसंख्या नीतियों और अन्य उपायों से प्रजनन दर कम तो हुई है पर फिर भी यह दूसरे देशों के मुकाबले बहुत अधिक है।

(2) बाल-विवाह और सार्वभौमिक विवाह प्रणाली – वैसे तो कानूनी तौर पर लड़की की विवाह की उम्र 18 साल है, लेकिन जल्दी विवाह की अवधारणा यहाँ बहुत प्रचलित है और जल्दी विवाह करने से गर्भधारण करने की अवधि भी बढ़ जाती है। इसके अलावा भारत में विवाह को एक पवित्र कर्त्तव्य और सार्वभौमिक विवाह प्रणाली माना जाता है।

(3) गरीबी और निरक्षरता    – आबादी के तेजी से बढ़ने का एक अन्य कारण गरीबी और निरक्षरता भी है। गरीब परिवारों में एक धारणा यह भी है कि परिवार में जितने ज्यादा सदस्य होंगे उतने ज्यादा लोग कमाने वाले होंगे। भारत अब भी गर्भ निरोधकों और जन्म नियन्त्रण विधियों के इस्तेमाल में पीछे है। कई लोग इस बारे में बात करना भी ख़ुदा की तौहीन समझते हैं। अज्ञानता के कारण छोटे परिवार के लाभों को नहीं जानते।

(4) पुराने सांस्कृतिक आदर्श भारत में बेटे परिवार में पैसे कमाने वाले माने जाते हैं। इस दकियानूसी सोच के चलते माता-पिता पर बेटा पैदा करने का दबाव बहुत बढ़ जाता है।

(5) अवैध प्रवासी भारत में बांग्लादेश, नेपाल से अवैध प्रवासियों की लगातार वृद्धि – से जनसंख्या घनत्व में बढ़ोत्तरी हुई है।

(6) संयुक्त परिवार व्यवस्था-संयुक्त परिवार में बच्चों की देखभाल में कठिनाई नहीं आती है। साधनों की कमी के बाद भी अधिक सन्तानों के जन्म को प्राथमिकता दी जाती है जिससे जनसंख्या बढ़ती जाती है।

(7) ग्रामीण अर्थव्यवस्था – ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उससे जुड़े हुए व्यवहार के तरीके भी जनसंख्या वृद्धि का कारण हैं। गाँवों में अधिकांश लोग यह समझते हैं कि अधिक बच्चे होने से खेती से सम्बन्धित कार्यों को सरलता से पूरा किया जा सकता है।

(8) जनसंख्या की प्रभावपूर्ण नीति की कमी समय-समय पर जनसंख्या की अनेक नौतियाँ तैयार की जाती है तथा ‘एक राष्ट्र एक संतान’ का नारा दिया जाता है। इसके बाद भी चीन की तरह जनसंख्या की किसी नीति को सभी धर्मों और क्षेत्रों के लोगों पर प्रभावपूर्ण ढंग से लागू नहीं किया जाता।

जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव-    आजादी के 73 साल के बाद भी बढ़ती आबादी के कारण देश का परिदृश्य कुछ खास अच्छा नहीं है। जनसंख्या वृद्धि के प्रभाव निम्नलिखित हैं-

(1) बेरोजगारी भारत जैसे देश में इतनी ज्यादा आबादी के लिए रोजगार पैदा करना बहुत मुश्किल है। अनपढ़ लोगों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती जा रही है इसलिए बेरोजगारी दर लगातार बढ़ती ही जा रही है।

(2) जनशक्ति का उपयोग बढ़ती जनसंख्या के चलते आर्थिक मंदी, व्यापार विकास और विस्तार गतिविधियाँ धीमी होती जा रही हैं।

(3) संसाधनों का दोहन-भूमि क्षेत्र, जल संसाधन और जंगल सभी का बहुत शोषण हुआ है। संसाधनों में कमी भी आई है।

(4) घटता उत्पादन और बढ़ती लागत-खाद्य उत्पादन और वितरण बढ़ती हुई जनसंख्या की बराबरी करने में सक्षम नहीं है। इसलिए उत्पादन की लागत में वृद्धि हुई है जो महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण है। भारत में जनसंख्या नियन्त्रण के लिए उपाय भारत सरकार और नीति निर्माताओं को एक मजबूत जनसंख्या नियन्त्रण नीति बनाने के लिए पहल करनी चाहिए, जिससे देश की आर्थिक विकास दर का बढ़ती आबादी की माँग के साथ तालमेल बिठाया जा सके। महिलाओं और बच्चियों के कल्याण और उनकी स्थिति को बेहतर करना, शिक्षा के प्रसार, गर्भनिरोधक और परिवार नियोजन के तरीके, यौन शिक्षा, पुरुष नसबंदी को बढ़ावा और बच्चों के जन्म में अन्तर, गरीबों के लिए ज्यादा स्वास्थ्य सेवा केन्द्र आदि कुछ ऐसे उपाय हैं जो आबादी को काबू करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

 

प्रश्न 4. भारत की जनसंख्या नीति की कमियाँ समझाते हुए इसे सफल बनाने के सुझावों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- जनसंख्या नीति- जनसंख्या नीति से अभिप्राय उस सरकारी दृष्टिकोण से है जिसके द्वारा देश में जनसंख्या के आकार, प्रकार एवं वितरण को पूर्व निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप नियोजित, नियमित एवं नियन्त्रित किया जाता है।

 भारत में राष्ट्रीय जनसंख्या नीति-   सन् 1976 में पहली राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाई गई। इसमें अधिक सफलता न मिलने पर जनसंख्या नीति को भारत के 20 सूत्रीय कार्यक्रम, 1982 का एक अंग बना दिया। गया। सन् 2000 में एक नई राष्ट्रीय जनसंख्या नीति लागू की गई इसमें जनसंख्या पर रोक लगाने के साथ ही स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार पर विशेष बल दिया गया। सरकार को जनसंख्या नीतियों के बार-बार असफल होने पर इसकी कमियों पर ध्यान आकर्षित करना होगा। जिससे उसे सफल बनाने के सुझाव को ढूँढ़ा जा सके। भारत सरकार की जनसंख्या नीति की कमियों निम्नलिखित हैं-

(1) सैद्धान्तिक अधिक भारत सरकार की जनसंख्या नीति सैद्धान्तिक अधिक तथा व्यवहारिक कम है।

 (2) बहुत ऊँचे लक्ष्य-भारत सरकार की जनसंख्या नीति में जन्म-दर में कमी करने के जो लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, वो काफी ऊँचे हैं।

(3) मौद्रिक प्रलोभन की नीति दोषपूर्ण व अपर्याप्त जनसंख्या नीति में जनसंख्या नियन्त्रण के लिए मौद्रिक प्रलोभनों की घोषणा की गई है। वे आधुनिक मुद्रा स्फीति को देखते हुए हास्यास्पद लगती है।

(4) अनिवार्य नसबन्दी की धारणा का त्याग अनुचित – भारत में तीन सन्तानों के बाद नसबन्दी की अनिवार्यता कानूनी रूप से बाध्य होनी चाहिए, लेकिन यह नीति स्वैच्छिक अधिक व व्यवहारिक कम साबित हुई है।

(5) यौन शिक्षा की उपेक्षा सरकार ने विद्यालयों में जनसंख्या नीति में मौन शिक्ष की उपेक्षा की है जो कि उपयुक्त नहीं है।

(6) कथनी और करनी में अन्तर- जनसंख्या नीति के सम्बन्ध में सरकार की कथनी । व करनी में काफी अन्तर है। इसी कारण वह इस क्षेत्र में अपने वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने में कामयाब नहीं हो सकी है। जनसंख्या नीति को सफल बनाने के सुझाव

भारत की जनसंख्या नीति को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं-

 

(1) जन्म-दर में कमी – भारत में जनसंख्या वृद्धि विस्फोटक गति से हो रही है। इस गति को धीमा करने के लिए सरकार को नियोजन कार्यक्रमों में और अधिक गति लानी होगी।

(2) राज्य की आवश्यकतानुसार कार्यक्रम-  राज्य की जनसंख्या नीति में विभिन्न राज्यों की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

(3) परिवार कल्याण को प्रोत्साहन    जनसंख्या नीति को सफल बनाने के लिए हमें परिवार कल्याण कार्यक्रमों पर और अधिक ध्यान देना होगा। इस कार्यक्रम का संचालन बच्चों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा, स्त्रियों के लिए उचित पोषण तथा उनकी अच्छी देखभाल के साथ किया जाना चाहिए।

(4) शिक्षा का प्रसार जनसंख्या   की वृद्धि दर को घटाने का चौथा उपाय शिक्षा का प्रसार है। शिक्षा के द्वारा हम लोगों को बड़े व छोटे परिवार के लाभ व गुणों के सम्बन्ध में जानकारी दे सकते हैं। शिक्षा के प्रसार से लोगों में पुराने धार्मिक विश्वासों एवं सामाजिक रीति रिवाजों को मिटाने और इस प्रकार परिवार नियोजन के अनुकूल वातावरण पैदा करने में महत्त्वपूर्ण सफलता मिलती है।

(5) निम्न वर्ग में अधिक प्रचार- परिवार नियोजन कार्यक्रम का प्रचार व प्रसार निर्धन वर्ग में अधिक जोर-शोर से किया जाना चाहिए।

(6) तीव्र आर्थिक विकास जनसंख्या नीति को सफल बनाने का सर्वोत्तम उपाय ‘तीव्र आर्थिक विकास’ है इसलिए सरकार को आर्थिक विकास की गति को तेज करना चाहिए।

(7) नसबन्दी कानून अनिवार्य अधिक जीवित बच्चों वाले दम्पत्तियों को कानूनन – नसबन्दी के लिए बाध्य किया जाना चाहिए ताकि जनसंख्या वृद्धि को काफी हद तक रोका ज सके। इसके अलावा विद्यालयों में प्रवेश व नौकरी में प्राथमिकता भी उन्हीं दम्पत्तियों के बच्चों को देनी चाहिए जो परिवार कल्याण कार्यक्रमों का पालन करते हैं, ऐसा करने से जनसंख्या नीति को सफल बनाने में काफी योगदान मिल सकता है।

 

प्रश्न 5. भारतीय समाज में ग्रामीण-नगरीय संयोजन का क्या अर्थ है? भारतीय समाज में ग्रामीण-नगरीय संयोजन के वर्तमान आधारों की विवेचना कीजिए।

उत्तर- ग्रामीण-नगरीय संयोजन से आशय ग्रामीण एवं नगरीय जन-जीवन में रहन-सहन के स्तर में अन्य भौतिक संसाधनों के प्रयोग में समानता लाने से है अर्थात् ग्रामीण-नगरीय विभाजन में कमी आने से है। भारतीय समाज में स्वतन्त्रता के बाद अनेक ऐसी दशाएँ उत्पन्न होने लगी जिनकी वजह से ग्रामीण-नगरीय भेद में तेजी से कमी आई है।

(1) नई प्रौद्योगिकी -नई प्रौद्योगिकी के फलस्वरूप ग्रामीण और नगरीय समुदाय एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं। गाँवों में आज अनेक नई नई तकनीकी वस्तुओं का उपयोग होने लगा है जिससे ग्रामीण समाज में नगरीय व्यवहारों को अपनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

(2) लोकतान्त्रिक व्यवस्था   स्वतन्त्रता के बाद देश में लोकतान्त्रिक व्यवस्था लागू की गई है जिसके फलस्वरूप ग्रामीण एवं नगरीय समुदायों के संयोजन को काफी बल मिला है। भारत की एक-तिहाई जनसंख्या ग्रामीण होने के कारण भारत के सारे राजनीतिक दल गाँव के लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हैं जिससे गाँव में अनेक राजनीतिक गुट बन जाते हैं। इन गुटों द्वारा जब कोई आन्दोलन या प्रदर्शन किया जाता है तो उसमें नगरीय विशेषताओं की झलक साफ मिलती है।

(3) सामाजिक समानताएँ- कुछ समय पहले तक नगर को एक विभिन्नतापूर्ण समाज और गाँव को एक समरूप समुदाय माना जाता था। आज अधिकांश गाँवों में विभिन्न धर्मों, जातियों एवं वर्गों के लोग साथ-साथ रहते हैं।

(4) सांस्कृतिक आदान-प्रदान- पूर्व काल में नगर और गाँवों की संस्कृति एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न है। आज गाँवों और नगरों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ने से दोनों के सम्बन्ध अधिक मजबूत बनने लगे हैं।

(5) नई बाजार व्यवस्था – नई बाजार व्यवस्था भी ग्रामीण और नगरीय संयोजन का प्रमुख आधार बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में नई बाजार व्यवस्था के परिणामस्वरूप अब आर्थिक प्रतियोगिता शुरू हो गई है। गाँवों में अब परम्परागत कृषि के स्थान पर नई तकनीकों द्वारा कृषि की जाने लगी है तथा अब व्यापारिक एवं नकदी फसलों के अधिकाधिक उत्पादन पर जोर दिया जाने लगा है जिसकी वजह से लोगों की आर्थिक स्थिति में बढ़ोत्तरी होने लगी है तथा लोगों के बीच शहरी विशेषताओं को अपनाने की ललक बढ़ गई है।

(6) विकास कार्यक्रम – ग्रामीण विकास के वर्तमान कार्यक्रमों ने भी गाँवों और नगरों की दूरी को कम किया है। गाँवों में स्थित चिकित्सा केन्द्रों, स्कूलों और दूसरे विभागों के अधिकांश कर्मचारी भी नगरों से ही सम्बन्धित होते हैं। इन सभी दशाओं के फलस्वरूप ग्रामीणों के व्यवहार नगर की जीवन शैली से प्रभावित होने लगे हैं।

 

प्रश्न 6. किसी अन्य देश की तुलना में भारत में अधिक मातृ मृत्यु के कौन-से कारण जिम्मेदार हैं? इस समस्या पर काबू पाने हेतु भारत सरकार ने कौन-कौन-से कदम उठाए हैं?

उत्तर- ‘माँ’ एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही हर व्यक्ति को अपनी जन्मदायिनी माता का ध्यान आ जाता है। परन्तु विडंबना यह है कि इसी मातृत्व के कारण विकासशील देशों की 15-15 वर्ष की लाखों महिलाएँ प्रतिवर्ष काल का ग्रास बन जाती हैं भारत में मातृ मृत्यु दर विकसित देशों की तुलना में चार गुनी है। भारत में हर 7 मिनट में एक महिला की मृत्यु मातृत्व के कारण होती है। भारत में अधिक मातृ मृत्यु के लिए निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं-

(1) पिछड़ापन तथा गरीबी,

(2) चिकित्सा सुविधाओं का अभाव,

(3) शिक्षा तथा जागरूकता की कमी,

(4) निदान में देरी। इस समस्या पर काबू पाने हेतु भारत सरकार के स्वास्थ्य मन्त्रालय द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं-

(1) स्वास्थ्य मन्त्रालय ने उन 264 जिलों में प्रभावकारी कदम उठाने की घोषणा की है। जहाँ लगभग 70 प्रतिशत मातृ तथा शिशु मृत्यु होती है।

(2) भारत सरकार गम्भीरतापूर्वक ‘एक मातृ तथा शिशु खोज पद्धति’ का क्रियान्वयन कर रही है, जिसके अन्तर्गत गर्भधारण करने वाली प्रत्येक महिला की सूची बनाई जाएगी, ताकि उनका प्रसव पूर्ण देखभाल, संस्थागत प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल तथा नवजात बच्चे का प्रतिरक्षण किया जा सके। भारत सरकार मातृत्व तथा परिवार नियोजन हेतु प्रतिबद्ध है तथा इसने विशेष तौर पर महिला तथा बाल स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हेतु 33-5 बिलियन खर्च करने की घोषणा की है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top